महार सैनिक सरकार बनानेके उद्देश से महार समाज ने 1815 के आस पास महार जुंता नाम संघटण बनाया था ! गाव गाव के महार कोतवाल जो गाव की रक्षा करते थे किले की रक्षा करते थे एसे कितने ही महार किलेदार , कोटवाल और राऊत सैनिक ज़िसे शिवाजी महाराज शुर राऊत यानी राज सी सैनिक कहते थे वे सब विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी पांडे पूजारी ब्राह्मण द्वारा उनके नागवंश मुलभारतिय हिन्दूधर्मी शिवाजी महाराज के ब्राहमिनो द्वारा किये गये अपमान से दुखी थे ! वे शिवाजी महाराज का कुल भोसले माता ज़िजाबाई का कुल जाधव , शिर्के , इंगले आदी सभी रिस्तेदार यह महार ही मानते थे ! शिवाजी संभाजी का अपमान को समस्त पूर्व राजकुल नागवंशी महार का अपमान ही समजते थे !
महार समाज कुस्ती , सैनिक आखाडा का शौक रखते थे कितने ही महार सैनिक, वस्ताद , उस्ताद, शिक्षक , गुरू माने जाते थे वे विदेशी ब्राह्मण पेशवा जो मुलता राजा शिवाजी के समाने जुते पेश करने के लिये नौकर पेशवा करके नियुक्त किये गये थे वे धिरे धिरे मराठी नागवंशी सरदार मे आपसी कलह , गृह कलह , विवाद , झगडे के कारण विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी जुते उठाने वाले ब्राह्मण पेशवा को सत्ता हथियाने से नही रोक पाये थे !
विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी पेशवा ने सिधे सिधे शिवाजी महाराज के कुल के महार सैनिक , किल्लेदार को निस्कशित कर अस्पृष्य अच्छुत घोशीत कर दिया था ! शिवाजी महाराज संभाजी महाराज ने जो धर्मात्मा कबीर ने पुनरस्थापित किया शुद्ध सत्य सनातन आद्य आदिवाशी सिंधु हिन्दू संस्कृती नागरिक अधिकार गण वेवस्था को जन्म देने वाला मुलभारतिय शिल सदाचार समता और बंधुत्व की शिक्षा देने वाला मुलभारतिय हिन्दूधर्म स्विकार किया था उससे बदला लेने के लिये छत्रपती को अन्देखा कर खुद पुना से पेशवा के नाम से शासन कर मराठी लोंगोंके उपर अनेक प्रकार से शोषण शुरू किये जीसमे कुंणबी तेली किसान बारा बालूतेदार सभी थे और खास कर विदेशी ब्राह्मंण से सिधे सिधे भीडने वाले महार मांग मेहतर मोची मिराशी आदिवाशी इन पर पेशवा क्रोधित थे !
जैसे शिवाजी ने पहले अपने महार समाज को इक्कठा कर और मराठी सभी बलूतेदारv मिलकार मावला सेना बनाई वैसा ही प्रयास महार समाज ने फिर एक बार 1815 के आस पास महार जुंता बनाने के लिये शुरू किया ! उस समय और उसके पहले भी कुछ समाज अपने अपने समाज की सेना बनाते थे जैसे भिल्ल , पेंधारी आदी आदी !
महार समाज के वस्ताद गुरू कुस्ती लाठी काठी , मुदगल दांडपट्टा तलवार भाला इत्यादी मे नीपुण थे , मेहनती , शुर विर थे , लढना राज सत्ता ऊनका पेशा था , वे राजा रहे थे !
उस समय पेशवा की सारी गतीविधी पुना मे होने के कारण महारोने कोंकण में अपनी महार वाडीया बनाई जो छूपी महार छावनिया थी ज़िस्का उद्देश ही विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के अमानविय पेशवा का विरोध कर महार मराठी शिव सत्ता विदेशी ब्राह्मण से मुक्त करना था ! मुम्बै कोंकण का ही हिस्सा था और मराठी भाषा के अलावा मदर्शी बंगाली गुजारती ,राजस्थानी हिन्दी आन्धारी कर्णाटकी महार माला मांघेली महारा मेहरा आदी नाम के महार बडी संख्या मे मुम्बै के आसपास मुम्बै मे रहते थे इन सब को साथ लेकर महार जुंता , महार एकता , महार सत्ता के छूपे प्रयास शुरू हुवे थे !
मुम्बै इलाखे के राऊतो ने महार जुंता शुरू किया जीसमे 500 से 1000 लढ़ाकु शिव काल के महार विर लोग है और वो ब्राह्मण पेशवा को मिटाना चाहते है इसकी भनक ब्रिटीश कंपनी को लग चुकी थी ! ब्रिटीश सैनिक अधिकारी महार जुंता के प्रमुख राऊ से मिले और समजाया तुम्हारा शत्रू विदेशी वैदिक ब्राह्मणधर्मी वर्णवादी तुम्हे अच्छुत अस्पृष्य कहने वाला विषमता वादी ब्राह्मण है ब्रिटीश नही क्यू की हम विषमता अस्पृष्यता नही मानते , तुम हमे साथ दो हम तुम्हे सैनिक प्रशिक्षण बेहतर तलवार खानपान अनुशासन और सैनिक नौकारी आदी शिक्षा सन्मान देंगे ! इन सभी से महार समाज वंचित था ! पेशवा ने महार समाज के मुख पर हांडी और कमर झाडू बांधने का फर्मांन निकाला था , महार कोई संपत्ती सैनिक अस्त्र शस्त्र नही रख सकता एसे आदेश पेशवा के थे कुल मिला कर पेशवा ने महाराजा शिवाजी संभाजी कुल के महार का जीवन नर्क बना दिया था और पायलागु करेने वाले मराठी चुपचाप बैठे थे !
महार जुंता के राऊतोने ब्रिटीश के साथ मिलकर विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी पेशवा की जल्मी सत्ता के अंत के लिये ब्रिटीश अधिकारी के देख रेख मे और सिद्ध नाक महार राऊत के नेतृत्व में 1818 के 1 जनवारी के भीमा कोरेगाव के युद्ध मे केवल 500 महार जुंता के विर सैनिको ने पेशवा के 28000 सैनिक को परास्त कर विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी पेशवा को महाराष्ट्र छोडकर उत्तर प्रदेश मे भागने को मजबुर किया ! युद्ध लढ़ता तो भगोडा निच्चित ही मारा जाता और उसका स्वगृह यूरेशिया मे भेजा जाता !
ब्रिटीश कंपनी सरकार ने महार जुंता का नाम महार के सन्मान ने मुम्बई नेटीव इनफेंट्री कर दिया ज़िस में प्राय सभी महार थे ज़िसमे उसके बाद अन्य अच्छुत भी सामिल किये गये ! ब्रिटीश जानते थे महार ही नागवंशी सिंधु हिन्दू संस्कृती के निर्माता विर योद्धा थे जो शुरू से ही वैदिक विषमतावादी ब्राह्मण से लढ़ता रहा है !
भीमा कोरेगाव का युद्ध अमान्य है क्यू की वो मानवता का युद्ध है , विषमाता विरुद्ध समता का युद्ध है !
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