Saturday, 31 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 1

पवित्र बीजक प्रग्या बोध : हिण्डोला  : 1

हिण्डोला  : 1 : 1

भरम  हिण्डोला  झूले , सब  जग  आय  ! 

शब्द  अर्थ  : 

भरम  = भ्रम , अग्यान  ! हिण्डोला  = भवचक्र !   झूले  = झुलना  , पालना मे  झुलना  ! सब = सब  लोग  !   जग   = शृष्टी   ! आय  = जन्म  लिया  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  इस  संसार  मे  हर  कोई  केवल झुला  झुलने  के  लालच  मे  जन्म  लेकर  आया  है  !  पर  वो  नही  जानता   है  यह  भ्रम  है !   क्यू  की  वह  कोई  सामान्य  झुला  नही  है ,  वह भवचक्र  यानी  एसा  झुला  है  जो  कर्म  फल  के  आधार  पर चलता  है  और  उसी  के  मुताबिक  आप  को  झोका  देता  है  !  कभी  उपर  कभी  निचे  ! कभी  आनन्द  कभी  डर  !  कभी  अधिक  झुलने  की  लालसा  आपको  झुले  से  निचे  ऊतरने  नही  देती  ! और  कर्म  फल  आपको  झुलाता  रहता  है  जन्म  मृत्यू  के  भवचक्र  में  !   वही  समझदार  है  जो  इसके  कार्य  को  ठिक  से  समझते  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Friday, 30 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 13

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बिरहुली  : 1 : 13

बिरहुली  : 1 : 13

कहहिं  कबीर  सच  पाव  बिरहुली 
जो  फल  चाखहु   मोर  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

कहहिं कबीर = कबीर  कहते  है  ! सच  पाव  = सत्यधर्म  मिला  ! जो  फल  = वो  फल  ! चाखहु  = चखा  रहा  हूँ  ! मोर  बिरहुली  = यही  मेरा  संसार  है  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  मैने  निराकार  निर्गुण  चेतन  तत्व  सार्वभौम सदा  के  लिये  अजर  अमर  सर्वव्यापी  कण  कण  में  बसा  राम  का  सत्यधर्म  प्रग्या   बोध  द्वारा  पाया  है !  इस   विशुद्ध  ग्यान  से  मै  सदा  आनन्दित  और शुखी  हूँ  !  और  इसके  प्राप्ती  का  मार्ग  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  जो  शिल  सदाचार भाईचारा समता  ममता  विश्वबंधुत्व  एकेश्वर  सत्यराम  की  प्राप्ती  का  मार्ग  आप  सब  को  बता  रहा  हूँ  ताकी आप  सब  का  भला  हो  कल्याण  हो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Thursday, 29 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 12

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बिरहुली  : 1 : 12

बिरहुली  : 1 : 12

जन्म  जन्म  यम  अन्तरे  बिरहुली 
फल  एक  कनयर  डार  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

जन्म  जन्म  =  हर  जन्म ! यम  अन्तरे  = मृत्यू  अन्दर  ही  है  !  फल  एक  = एक  ही  फल  ! कनयर  डार  = कर्म  फल  की  शाखा   है  ! बिरहुली  जग  , संसार  , माया  मोह  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  जन्म  के  साथ  ही  मृत्यू  का उदय  होता  है !  जहा  जन्म  वहा  मृत्यू  निच्छित  है !  पर  जीवन  जो  जन्म  मृत्यू  के  बिच  का  अन्तर  है  वह  कर्म  से  बंधा  हुवा है  !  जैसा  कर्म  करोगे  वैसा  फल  मिलना  निच्छित  है !   जैसे  जन्म  और  मृत्यू  !  यहाँ  तक  की  कर्म  का  फल कभी   तुरंत   कभी  कुछ  समय  बाद  तो  कहि  मृत्यू  के  बाद  भी  मिलता  है   तो  कहि  आगे  का  जन्म  कैसे  कहा  और  क्यू  हो  !  इस  पुरे  वेवस्था  को  भवचक्र  कहा  जाता  है  जो  इस  शृष्टी  , विश्व  , जग  का  नियम  है !   इस  लिये  कर्म  एसा  कीजिये  की  उसका  फल  इस  जन्म  में  या  अन्य  जन्म  में  सुखद  मिले  और  यह  सुखद  उत्तम  जन्म  फल  शिल  सदाचार भाईचारा  समता  ममता विश्वबंधुत्व अहिंसा  परोपकार  के  धर्म  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  सिवाय  अन्य  कोई  नही  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Wednesday, 28 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 11

पवित्र बीजक : प्रग्या  बोध  : बिरहुली  : 1 : 11

बिरहुली  : 1 : 11

विष  की  क्यारी  तुम  बोयहू  बिरहुली 
अब  लोढ़त  का  पछिताहु  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

विष  की  क्यारी  = विष  की  गुठली  ! तुम  बोयहू  = तुमने  बोया  है  ! अब  लोढ़त = अब  उसके  फल  !  पछिताहु  = पच्छाताप  करना  ! बिरहुली  = संसार , जग  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  जैसा  कर्म  करोगे  वैसा  ही  फल  पावोगे ! आम  की  गुठली   बोवोगे  तो  आम  का  वृक्ष  ही  ऊगेगा  बडा  होगा  छाव  फल  देगा !   पर  काटे  भरे  विशैले  और  पत्ते  रहित  किसी  काकटस  का  पेड  लगवोगे  तो  वह  सुखद  छाव  कहासे  देगा ?   उसके  निचे  तुम  कैसे  सुख  से  विश्राम  आराम  कर  पावोगे  ,  कैसे  तुमहे  उसके  निचे  चैन  की  निन्द  आयेगी  ! विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  यह  विष  और  काटे  वाला  बिना  छाव  का  ही  धर्म  है  , वहा  मानव  कल्यान  कहासे  मिलेगा  ? 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Tuesday, 27 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 10

पवित्र  बीजक  : प्रग्या बोध  : बिरहुली  : 1 : 10

बिरहुली  : 1 : 10

विषहर  मंत्र  न  मानै  बिरहुली 
गारूड़  बोले  अपार  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

विषहर  = विष  हो  हरने  वाला , विष  का  असर  नष्ट करने  वाला , सच्चा  धर्म ग्यानी   !  मंत्र  = धर्म  ग्यान  ! न  मानै  = न  जानना  ! गारूड  = खुद  को  सपेरा  कहने  वाला  धर्म  ग्यानी  ! बोले  अपार  = बहुत  थोता  ग्यान  बाटता  है  ! बिरहुली = माया  गस्त  जग  संसार  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों इस  मोह  माया  इच्छा  तृष्णा  वासना कामना  लालच  भरे  जहर  भरे  संसार  में  जहर  ऊतारने  वाले  सच्चे  धर्म  ग्यानी   मांत्रिक  बहुत  कम  है  ! अधिकतर  लोग  बहुत  व्यर्थ  की  बडबड  करते  है  जैसे  की  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्मी पांडे  पंडित  पूजारी  ! इन का  खुद का  धर्म  जहर  भरा  वर्ण  जाती  वादी  वेद  और  मनुस्मृती  का  विष  भरा  अधर्म  और  विकृती  है  जो  ऊचनीच  छुवाछुत  अस्पृष्यता  गाय  बैल  घोडे  की  बैल  वाला  होमहवन  दारू देवदासी स्त्रीशोषण सतीप्रथा बलात्कारी  ब्रह्मा  आदी  जहर  से  भरा पडा  है  और  वे  इसी  जहर  का  गुणगान  करते है  एसे  थोते  पंडित  आप  का  क्या  भला  करेंगे  जो  खुद  जहर  भरे  लोग है  !

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Sunday, 25 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 8

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली  : 1 : 8

बिरहुली  : 1 : 8 

सो  फुल  लोढ़े  सन्त  जना  बिरहुली 
बन्दि  के  राउर  जाय  बिरहुली   ! 

शब्द  अर्थ  : 

सो  फुल  =  वही  परिणाम  !  लोढ़े  = पसंद  ! सन्त  जाना  = विचारी  लोग  , साधु , सभ्य  ! बन्दि के   = बन्धन  के   !  राउर  = राजा  , धनी  ! जाय  बिरहुली  = मोह  माया  ग्रस्त  होना  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  सन्त  साधु  प्रवृत्ती  के  लोग  मोह  माया  भरे  संसार  से  दुर  रहते  है,  उसके  परिणाम  जानते  है  !  पर  धनवान  राजा  तो  बस  सत्ता और   अधिक  संपत्ती  के  मोह  में  अंधे  हो  जाते  है !   बिरले  कुछ  लोग  है  जो  राजा  धनी  होते  हुवे  भी  जागृत  होते  है  और  अपनी  सत्ता  संपत्ती  का  उपयोग  धर्म  प्रचार  प्रसार  और  खुद   धार्मिक  जीवन  बिताने  मे  करते  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Saturday, 24 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 7

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली  : 1 : 7

बिरहुली  : 1 : 7 

फूल  एक  भल  फुलल  बिरहुली  
फूलि  रहल  संसार  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

फूल  = दृष्य ,  फुल , फल  ! भल  फुलल  = सुन्दर  दृष्य  !  फूलि  रहल  संसार  = ये  संसार  वृक्ष  ! बिरहुली  = मोह  माया  युक्त  संसार  , जग  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यह  संसार  एक  वृक्ष  के  जैसा  है  जीस  पर  सुन्दर  फुल  दिखाई  देते  है  !  ये  फुल  बडे  आकर्षक  है  , ललचाने  वाले  है,  मोहित  करने  वाले  है,  पर  तृष्णा  भरे  है !   कभी  समाप्त  नही  होते !   उल्टे  एक  लो  तो  दो  नये  निकल  आते  है !   जैसे  इच्छा  के  फुल  कभी  नही  मरते  ! इस  लिये  संयम  और  धर्म  , श्रद्धा  और  सबुरी  से  काम  लो  !  फुल  से  केवल  मोहित  ना  हो  गुण  दूर्गुण  जानो !  कबीर  साहेब  यही  परख  का  ग्यान  देते  है  ,  ताकी  विशैले  फल  के  दूष  परिणाम  से  बचो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Friday, 23 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 6

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बिरहुली  : 1 : 6

बिरहुली  : 1 : 6 

छिछिलि  बिरहुली  छिछिलि  बिरहुली 
छिछिलि  रहल  तिहुँलोक  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

छिछिलि  =  सतही , उपरी  ! बिरहुली  = जग  , संसार  मे  मोह  माया  ! तिहुँलोक  = त्रिकाल  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यह  संसार  जग  सतही  बातो  को  जादा  महत्व  देता  है  पर  अंतर्मन   से  विचार  बहुत  कम  करता  है  !  तिनो  समय  सभी  जगह  मानव  मोह  माया  ग्रस्त  है  क्यू  की  उसकी  सोच  ही  सतही  है  जैसे  पत्थर  की  पूजा  ,  तिर्थ  यात्रा  , गंगा  नहाना , ब्राह्मण  ने  बताते   कर्म  कांड  और  अंध  श्रद्धा  , अंध  विश्वास  !  ये  सब  सतही  बाते  है  धर्म  कम  , कर्म  कांड  जादा  है  !  छुवाछुत  , भेदभाव  ऊचनीच , जाती  वर्ण  जनेऊ  होमहवन  गाय  बैल  घोडे  की  बली  , चौरी  झूठ  मक्कारी  बलात्कारी  देव  आदी  में  कहा  धर्म  है  ? 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Thursday, 22 January 2026

Daulatram Alias Nativist DD Raut

#नेटीवीस्ट_डीडी_राऊत_पवनी_के_नागवंशी_राजा  !

नाग  कुल  राऊत  यह  पवनी  का  प्राचीन  कुल  है  ज़िसकी  कुल  देवता  नाग  मन्दार  यानी  मूचिलिन्द  नाग  है  जो  पवनी  का  नाग  वंशी  राजा  था  ज़िसने  बुद्ध  की  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक   धर्मी  ब्राहमिनो  से  रक्षा  की  थी  ! बुद्ध  से  अनुग्रहित  होकर  जब  वापस  अपने  राज्य पवनी   लौटे  ऊँहोने  बुद्ध  ने  दिया  नाखून  पर  बुद्ध  विहार  बनवाया   जो पवनी  के  उत्खनन  में  जगन्नाथ  मन्दिर  शुक्रवारी  वार्ड  पवनी  मे  बाल  समुद्र  के  पास  है  ! इस  का  शोध  भी   नेटीविस्ट  डी  डी  राऊत  के  करीबी  रिस्तेदार  मंसाराम  राऊत  और  गणपत  खापर्डे  ने  किया  था  !

नेटीविस्ट  डी  डी  राऊत  के   कुल  देवता नाग  मन्दिर  को   बंगला  यानी  राज  महल  कहा  जाता  है  जो  आज  ज़िर्ण  झोपडी  अवस्था  मे  है  !

हम  राऊत  जो  इसके  पूजारी  और  रहवासी  मालिक  है  !  आज  भी  हम  अपने  आप  को  नाग  वंशी  मूचिलिन्द  राजा  के  वन्शज  और  उत्तराधिकारी   मानते  है  हमे  जगन्नाथ  मन्दिर  परिसर  की  भुमी  मिलनी  चाहिये  ! पुरा  पवनी  गाव  और  विदर्भ  हमारा  राज्य  था  ज़िसके  हम  उत्तराधिकारी  है  ! 

हम  आज  नाग  वंशी  पवनी  के  राजा  होते  तो  एसे  होते  जैसे  फोटो  मे  बताया है  ! 

#दौलतराम

Nativist DD Raut

#नेटीवीस्ट_डीडी_राऊत_पवनी_के_नागवंशी_राजा  !

नाग  कुल  राऊत  यह  पवनी  का  प्राचीन  कुल  है  ज़िसकी  कुल  देवता  नाग  मन्दार  यानी  मूचिलिन्द  नाग  है  जो  पवनी  का  नाग  वंशी  राजा  था  ज़िसने  बुद्ध  की  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक   धर्मी  ब्राहमिनो  से  रक्षा  की  थी  ! बुद्ध  से  अनुग्रहित  होकर  जब  वापस  अपने  राज्य पवनी   लौटे  ऊँहोने  बुद्ध  ने  दिया  नाखून  पर  बुद्ध  विहार  बनवाया   जो पवनी  के  उत्खनन  में  जगन्नाथ  मन्दिर  शुक्रवारी  वार्ड  पवनी  मे  बाल  समुद्र  के  पास  है  ! इस  का  शोध  भी   नेटीविस्ट  डी  डी  राऊत  के  करीबी  रिस्तेदार  मंसाराम  राऊत  और  गणपत  खापर्डे  ने  किया  था  !

नेटीविस्ट  डी  डी  राऊत  के   कुल  देवता नाग  मन्दिर  को   बंगला  यानी  राज  महल  कहा  जाता  है  जो  आज  ज़िर्ण  झोपडी  अवस्था  मे  है  !

हम  राऊत  जो  इसके  पूजारी  और  रहवासी  मालिक  है  !  आज  भी  हम  अपने  आप  को  नाग  वंशी  मूचिलिन्द  राजा  के  वन्शज  और  उत्तराधिकारी   मानते  है  हमे  जगन्नाथ  मन्दिर  परिसर  की  भुमी  मिलनी  चाहिये  ! पुरा  पवनी  गाव  और  विदर्भ  हमारा  राज्य  था  ज़िसके  हम  उत्तराधिकारी  है  ! 

हम  आज  नाग  वंशी  पवनी  के  राजा  होते  तो  एसे  होते  जैसे  फोटो  मे  बताया है  ! 

#दौलतराम

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 5

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 5

बिरहुली : 1 : 5

नित गौड़ैं नित सीचैं बिरहुली 
नित नव पल्लव डार बिरहुली ! 

शब्द अर्थ : 

नित गोड़ैं = हमेशा गाड़े ! नित सीचैं = नित पानी देना , देखभाल करना ! नित नव पल्लव = नई पालवी , अंकुर आना ! पल्लव डार = शाखा डालिया ! बिरहुली = संसार , जग ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों संसार का निर्माता , चालक , मालक केवल एक है और वो है निराकार निर्गुण चेतन तत्व राम ! वह सार्वभौम है कण कण में है और वो सब में है और सब उसमे है ! सारी निर्मिती पोषण क्षय उसी की इच्छा और अंतिम है ! संसार का बीज डाल पत्ते फुल फल और फिर अंत मे बीज उसी की नित नई निर्मिती है ! हमे किसी बात का अहंकार नही करना चाहिये ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Wednesday, 21 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 4

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  बिरहुली  : 1 : 4

बिरहुली  : 1 : 4

मास  असारे  शीतल  बिरहुली 
बोइनि  सातों  बीज  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

मास  = महिने  ! असारे  = सभी  ! शीतल  = अनुकुल  , ठंड  ! बोइनि  = बुवाई , लगाना  ! सातों  = सभी  प्रकार  के !  बीज  = जन्म  उगम  का  स्त्रोत  , मुल  बीज  !  बिरहुली  = शृष्टी  , जग  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  निराकार  निर्गुण  चेतन  तत्व  राम  ने  शृष्टी के  निर्मांण   के  लिये  सभी  काल  अनुकुल  बनाये  जो  बीज  को  धारण  कर  विविध  प्रकार  के   पेड  पोंधे  बेल  त्रूण   घास  फुल और  कन्द  मुल  वाले  अनाज  पैदा  किये  ज़िस  से  पृथ्वी  के  जीव  जन्तु  प्राणी  पशु  पक्षी  जलचर  थलचर  किट  फ्तंग  सब  का  उदर  निर्वाह  हो, भरण  पोषण हो  अन्न  जल  वायू  शितलता  और  धुप  मिले  ताकी  ऋतु  अनुसार  जीवन  चक्र  बना  रहे  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Guru Parampara !

#विदेशी_यूरेशियन_वैदिक_ब्राह्मणधर्म_गुरू_परम्परा ! 

विदेशी  युरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म के  गुरू  की  परम्परा  ब्रह्मा  , ब्रिहस्पती , मनु  से  वशिष्ठ  तक  आते  आते  दम  तोड  चुकी  थी   मौर्य  सम्राट   संप्रती यानी  राम और  उनके  रिस्तेदार नन्द  कृष्ण    के  काल  तक  ब्राह्मण  बहुत  कमजोर   हुवे  थे  और  जैंन  बौद्ध  गुरू  परम्परा  मजबुत  हुवी  थी  !  बौद्ध  और  जैंन  धर्म  और  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  साधु  संतोने  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  मानने  से  इंकार  किया  और  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  मुठ्ठी  भर  ब्राहमिनो  मे  सीमित  रह  गया  और   ब्राह्मण  गुरू  न  के  बराबर  हुवे   7 - 8 शताब्दी  में  कोई  ब्राह्मण   धर्मग्रंथ  नही  था  जब  की  बौद्ध  जैंन  धर्म  ग्रंथ  विपुल  थे  ! 

तुर्की  धर्मी   आक्रमण   शुरू  हुवे  यही  मौका  देख  कर  विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी लोगो  ने  तुर्की  धर्मी  आक्रमको  से  हाथ  मिलाकार  जैंन  बौध  हमुलभारतिय  हिन्दू  मन्दिर  मठ  ज़िनालय  तुडवाये  आग  लगवायी  और और  नस्ट  करने  में  भाग  लिया  ! यह  छूपकर  किया  गया  वार  था  ! 

इसी  समय  कुछ  ब्राह्मण  काशी  मे  ईकठ्ठा  हुवे  और  एक  नवजवान  केरली  बच्चे  को  आगे  कर  बौद्धो  के   मठ  अपने  कबजे  मे  करने .की  योजना  बनाई  गई  और  आज  के  वैदिक  ब्राह्मणधर्म   चार  शंकराचार्य  मठ  बने  बनाये  बौध  मठ  को  तुरकी  शाषकों  से  संरक्षण  मांगा ! बौध  जैंन  मुलभारतिय  हिन्दू  धर्म  मे  पलायन  हुवा   आचार्य  गुरू  न  रहे  और  संकराचार्य  के  चेले  ब्राह्मण  ग्रंथो  निर्मिती  बौध  जैंन  हिन्दू  धर्म  मान्यता  आदी  की  चौरी   करते  हुवे  की  गयी ,   7 से  10 शताब्दी  का  यही  वह  काला  युग  है   ! 

शंकारचार्य  की  नौटंकी वहा  से  शुरू  हुवी  !  आज  जो  ब्रह्मसुत्त  , अद्वैत , वेदांत  का  दर्शन  संकराचार्य  दे  रहे  है  वह  मुलता   बौद्ध  जैंन  दर्शंन  है  ज़िसे   बौध  गाथा  आदी  मे  देखा  जा  सकता  है  पर  ब्राहमिनोने  अपना  मूर्खता  भरा  वैदिक ब्राह्मणधर्म के  विकृत  स्वरूप  वर्ण जाती भेदभाव अस्पृष्यता  विषमता छुवाछुत शोषण  जनेऊ  सोवला होमहवन शेंदी  कटोरी  आदी  बनाये  रखा  और  कभी  भी  हिन्दू  जैंन  बौद्ध  नही  बने  जो  बने  दीखावटी  बने   और  मौका  मिलते  ही  हम  ब्राह्मण  है  कहते   रहे  ! 

आज  जो  संकराचार्य  है  वह  वैदिक  ब्राह्मणधर्म   के  आचार्य  है  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म के  नही  ! आज  जैंन  धर्म  और  बुद्ध  धर्म  के  आचार्य  भी  देखे  जाते  है  और  अन्य  धर्मोके  भी  आचार्य  है  !

मुलभारतिय  हिन्दूधर्म   की  परमात्मा कबीर ने  14 - 15 शताब्दी  मे  पुनरस्थापित  किया  ज़िसका  एकमात्र  धर्मग्रंथ है  कबीर  वाणी पवित्र  बीजक और  कानुन  है  हिन्दू  कोड  बिल  के  कायदे  और  धर्मपीठ  है  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान कल्याण  ज़िसका  दौलतराम  जगतगुरू  है  ! 

#दौलतराम

Tuesday, 20 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 3

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध :  बिरहुली  : 1 : 3

बिरहुली  : 1 : 3

ब्रह्मादिक  सनकादिक  बिरहुली 
कथि  गये   योग  अपार  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

ब्रह्मादिक  = ब्रह्मा  इत्यादी  ! सनकादिक  = सनक , संन्दन  आदी  बाल  कुमार  ! कथि  गये  = कहकर  गये , बताकर  गये  ! योग  अपार  = अनेक  योगी  जैसे  गोरखनाथ  आदी  ! बिरहुली  = संसार  , शृष्टी  यह  जग  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  यूरेशियन वैदिक  ब्राह्मणधर्म  के  ब्रह्मा  उनके  मनु  आदी  ने  वर्ण  जाती  भेदभाव अस्पृष्यता  विषमाता  आदी  वेवस्था बनाई  अधर्म  और  विकृती  को  धर्म  और  संस्कृती  बताई  !  लोग  जब  अविश्वास  करने  लगे  तो  बाल  ब्रह्मचारी  सनक  संन्दन  आदी  की  नौटंकी  करा  दी  , शृती  स्मृती  होम  हवन  जनेऊ  आदी  बेकार  बातो  के  बाद  अवतार  प्राणप्रतिष्ठा  असत्य नारायण आदी  अंधश्रद्धा  निर्मांण  किया !  कारोडो  देव  और  उनके अवतार  मन्दिर  से  लोगो  की  लूटमार  होते  रही !   फिर  अरण्यक  वेदांत  के  नाम  से  उल्लू  बनाते  रहे !   बिच  मे  योग  हटयोग  से  लोगोंको  डराते  रहे  और  अब  सनातन  सनातन  कर  अपने  पाप  छूपा रहे  है  जब  की  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म ना  तो  सनातन  है  नाही पुरातन  ! वास्तव  मे  वो  धर्म  है  ही  नही  शैतान की  नौटंकी  विकृती  और  अधर्म  है ,  इस  से  संसार  मे  जग  मे  मानव  सुखी  होना  असंभव  है  !  

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म  विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Monday, 19 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 2

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली  : 1 : 2

बिरहुली  : 1 : 2

निशि  - बासर  नहिं  होते  बिरहुली 
पौन  पानि  नहिं  मूल  बिरहुली  !

शब्द  अर्थ  : 

निशि  बासर   = दिन  रात्र  ! पौन  पानि = पवन  पानी  ! मूल  = प्रथम  ! बिरहुली  = जग  , संसार , शृष्टी  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  अगर  चेतन  तत्व  निराकार  निर्गुण परमात्मा  राम  न  होता  तो  न  यह  संसार  होता  न  वायू  हवा  पानी  होता  !  चेतन  तत्व  राम  ही  सब  का  मूलस्तोत्र  है  , वही  से  सब  की  निर्मिती  है  और  वही  अंत  मे  समाना  है  ! उस  परमतत्व  चेतन  राम  का  हमेशा  स्मरण  करो  , नमन  करो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण अखण्ड हिन्दुस्तान शिवशृष्टी

Sunday, 18 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 1

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : प्रकरण नवम : बिरहुली 

 पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 1

आदि अन्त नहिं होते बिरहुली 
नहिं जर पल्लव डार बिरहुली ! 

शब्द अर्थ : 

आदी अन्त = शुरू और आखिर ! नही होते = 
ना थे ! बिरहुली = बाहारी , दुसरा , जग , शृष्टी ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों वह परमतत्व निराकार निर्गुण चेतन तत्व राम परमात्मा केवल एक है , वही एकमात्र निर्माता मालक चालक है ! जब ये पेड पौंधे डाल फुल फल मुल बीज कुछ नही थे तब भी वह एक मात्र तत्व चेतन राम था ! शुरू में भी वही है और अंत में भी वही इस बात को समझो ! सब कुछ वही है सब कुछ दृष्य अदृष्य उसी में है ! उस परम तत्व चेतन राम का स्मरण करो , उसी को नमन करो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Saturday, 17 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : 2 : 16

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि  : 2 : 16

बेलि  : 2 : 16 

मन  बुद्धि  ढिग  फैलायउ , हो  रमैया राम 

शब्द  अर्थ  : 

मन  बुद्धि  = मन  गढंत  !  ढिग  = बहुत  !  फैलायउ  = प्रचार  प्रसार  किया  !  हो  रमैया राम = हे  राम  को  मानने वाले  सज्जन जनो ! 

प्रग्या  बोध :

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  ने  बुद्धि  को  भ्रमित  करने  वाले  मनगढंत  ग्रंथो  का  ढेर  लगा  दिया  है  और  इनमे  वर्ण  जाती  भेदभाव अस्पृष्यता  शोषण  गुलामी  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा अधर्म  जनेऊ  सोवला  होमहवन  बली  दारू  देवदासी  स्त्रीशोषण  सतीप्रथा  बलात्कारी  ब्रह्मा  विष्णु  भगवान  के  अवतार  आदी  सभी  अधर्म  विकृती का  समर्थन  करने  वाले  ग्रंथो  का  पहाड  खडा  किया   ताकी  लोग  एक  से  छूटे  तो  दुसरे  मे  फसे  !  कबीर  साहेब  कहते  है  भाईयों  ये  तुम्हारा  धर्म  नही  ! ये  मक्कार लोगोंका  धर्म  है  जो  विदेशी  है  !  यूरेशिया  से  आये  है  और  अधर्म  विकृती  अपने  साथ  लाये  है  !  मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  आप  का  अपना  सनातन  पुरातन आद्यधर्म  लोकधर्म आदिवाशी  सत्यधर्म   शिल  सदाचार भाईचारा समता  ममता विश्वबंधुत्व  एकेश्वर  निराकार  निर्गुण चेतन तत्व  राम  को  मानने  वाला  मुलभारतिय हिन्दूधर्म  है  ! विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म और  मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  अलग  अलग  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Mouni Maharaj Dharm Guru of Shivaji !

#मौनी_महाराज_हे_नागवंशी_मुलभारतिय_शिवाजी_महाराज_धर्मगुरू  ! 

मौनी  महाराज  हे  शिव  कालिन  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  चे  धर्मात्मा  कबीर  अनुयायी  व  कबीरवाणी पवित्र  बीजक चे प्रचारक , किर्तनकार  होते ! भोसले  आणी  जाधव  परिवार  हे  सुद्धा  कबीर  अनुयायी  होते  ! कबीरपंथी  साधु  संताचा  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्मी  पांडे  पूजारी  संकराचार्य  अतोनात  छड  करित  असत  ! निच्छल  गोसावी  जाने  शिवाजी  महाराज  चा  दुसरा   राज्याभीषेक  केला  तो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  चा  एकमात्र  धर्मग्रंथ  पवित्र  कबीरवाणी  बीजक  तिल  धर्मात्मा  कबीर  दोहे गावूँनच  केला  होता त्या  मुले  शिवाजी  महाराज   नंतर  संभाजी  महाराज  चा  राज्या  भीषेक  सुद्धा  कबीरवाणी  नेच  केला  गेला होता  त्या  मुले  संभाजी महाराज  ने  जगतगुरू  पीठ  म्हणुन  मान्यता  दिली  होती  !  याच  पिठाला  छात्रपीठ  ची  मान्यता  आणी  अनुदान  दिले  ! मराठा  आणी  इतर  गैर  ब्राह्मण  हिन्दू  साठी  बेनाडीकर  पाटील  यांची  जगतगुरू  म्हणुन   राज  मान्यता  देण्यात  आली  तथापी  पूढे  वेद  , वैदिक विधी  चे  अनावश्यक  शिक्षण  आणी  वैदिक  विचार  ची  भेसड  झाल्या  मुले  कार्य  पूढे  जावू  शकले  नाही  ! 

आज  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  चे  काम  धर्मविक्रमादित्य  कबीरसत्व  परमहंस  दौलतराम  ,जगतगुरू  नरसिन्ह मुलभारती , मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  विश्वपीठ  ,कल्याण  च्या  माध्यमातुन   शुरू  असुन  त्याला  लोकांचा  उत्सपूर्त  साहयोग  लाभत  आहे 

#दौलतराम

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 15

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 15

बेलि : 2 : 15

कहहिं कबीर सुनो सन्तो , हो रमैया राम ! 

शब्द अर्थ : 

कहहिं कबीर = कबीर कहते है ! सुनो सन्तो = सुनो साधु संतो ! हो रमैया राम = हे सद पुरूषो , राम को मानने वाले ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों मेरी बात सुनो चेतन तत्व राम से सब की निर्मिती हुवी है और यहाँ जो कुछ है नही है सब कुछ राम ही है वह निराकार निर्गुण चेतन राम हम सब में है और हम सब उसमे , अन्दर बाहर सब वोही है वही एकमात्र मालक चालक परमात्मा परमपिता है वही जुडता टूटता रहता है वही सत्य शिव सुन्दर है ! उसे जानो पहचानो ! उसे जानने पहचाननेका मार्ग है सत्य मुलभारतिय हिन्दूधर्म के शिल सदाचार का आचरण पलान अन्य कोई मार्ग नही ! धर्म पालन से हम उसके नजदिक जाते है और अधर्म पालन से दुर ! विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म धर्म है ही नही वो अधर्म और विकृती है तो तुम्हे वहा राम , आराम सुख शांती काहाँ से मिलेगी ? भाई मुलभारतिय हिन्दूधर्म राम का धर्म है उसका पालन करो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Thursday, 15 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 14

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 14

बेलि : 2 : 14

कालबूत सब आहिं , हो रमैया राम !

शब्द अर्थ : 

कालबूत = मृत्यू , भूत काल ! सब आहिं = सब को आता है ! हो रमैया राम = हे सज्जन मनुष्य जनो ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों मृत्यू सब को आता है इस महान सत्य को जानो और अपना जीवन एसे धर्माचरण से बितावो ज़िसमे कभी पछतावा न हो ! आपका अपना सनातन पुरातन आद्यधर्म लोकधर्म आदिवाशी मुलभारतिय हिन्दूधर्म शिल सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व एकेश्वर निराकार निर्गुण सत्य अहिंसा मानवता का धर्म है ज़िसके आचरण से सब का भला होता है ! सब का कल्याण होता है ! वही दुसरी तरफ यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म में वर्ण जाती भेदभाव अस्पृष्यता शोषण गुलामी पुंजीवाद वसाहतवाद अंधश्रद्धा अधर्म विकृती जनेऊ सोवला होमहवन बली दारू सोंमरस देवदासी स्त्री शोषण गुलामी मनुवाद ब्राह्मणवाद , लंपटवृती , बलात्कारी ब्रह्मा इन्द्र सोम आदी को देव बताया गया है ! ऐसे विकृत धर्म को मानने से किसी का क्या भला होगा ? भाईयों मुलभारतिय हिन्दूधर्म और विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अलग अलग है ! दोनो के फल भी अलग अलग है !  

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Wednesday, 14 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 13

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 13

बेलि : 2 : 13 

फिर पाछे जनि हेरहु , हो रमैया राम ! 

शब्द अर्थ : 

फिर पाछे = बादमे ! जनि हेरहु = जानना , समझ मे आना ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों गलती एक बार होती है पर बार बार गलती कर बादमे पछताने से क्या फायदा ? आप सब जानते हो विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म आपको निच अस्पृष्य मानता है और ये कोई एक दिन की बात नही तब भी आपको अक्ल नही आ रही है तो कब समझ आयेगी ? और मृत्यू के बाद आप क्या खाक अच्छा धर्म निभा पावोगे ! यही समय है सुधरनेका ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Tuesday, 13 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 12

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध :  बेलि  : 2 : 12

बेलि  : 2 : 12

मन  बढ़ि  रहल  लजाय , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

मन  = इच्छा  , तृष्णा , वासना  ! बढ़ि  =  जादा  ! रहल  लजाय  = लज्जित  करती  है  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  की  शिक्षा  मन  पर  अंकुश  नही  है  वह  लालच  , झूठ  , मक्कारी , पाप  चौरी  बलात्कार  आदी  दूर्गुण  को  बढावा  देने  वाला  धर्म  है  विषमता  शोषण  जातीवाद  वर्णवाद  मनुवाद  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा  जनेऊ  सोवला  होमहवन  बली  दारू देवदासी  प्रथा आदी  सभी  बुराईया  को  बढावा  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  देता  है  , मन  को  सुसंकृत  करने  के  बाजय  विकृत  करता  है  अधमी  बनाता  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Monday, 12 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 11

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  बेलि  : 2 : 11

बेलि  : 2 : 11

यह  मुनि  के  धीरज  धरहु , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

यह  मुनि  =  इनके  मुनि  ! धीरज  धरहु  = शांत  रहे  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस पद  में  कहते  है  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  के  मुनि  शिग्रह  कोपी  है  ! छोटी  छोटी  बात  पर  क्रोधित  हो  कर  शाप  देना  गाली  देना  दंड  देना  इनकी  आदत  है !  क्या ये  धर्म  है  ?  क्या  ये  उचित  ह ?   इनका  इनके  मन  पर  लालच  माया मोह इच्छा  तृष्णा  वासना कामना पर  कोई  अंकुश  नही  !  क्या  ये  मुनी  कहलाने  के  लायक  है  ?  एसे  मुनी  जो  जाती  वर्ण  ऊचनीच  भेदभाव  अस्पृष्यता  छुवाछुत शोषण  गुलामी  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा अधर्म  विकृती का  समर्थन  करते  क्या  वे  मुनि  महाराजा  महंत  कहलाने  के  लायक  है  ? कभी  नही  मनु  कभी  मुनि  नही  हो  सकता  !  लंपट  ब्रह्मा  कभी  भगवान  नही  हो  सकता ,  इनका  मन  बेकाबू  है  और  मानव अहित  मे  काम  करता है !   ये  त्याज्य  है,  इनका  धर्म  अधर्म  है, विकृत  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Sunday, 11 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 10

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध  : बेलि  : 2 : 10

बेलि  : 2 : 10 

तहाँ  खोज  कैसे  होय , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

तहाँ  = वहाँ  वैदिक  धर्म  में  ! खोज  = सत्य  ग्यान  ! कैसे  होय  = किस  प्रकार  होगा  ! हो रमैया राम = हे  सज्जन  लोगो  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  में  न  केवल  वर्णवाद  जातीवाद  विषमता  छुवाछुत  अस्पृष्यता शोषण  सतीप्रथा  गुलामी  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा  जनेऊ  सोवला  बलात्कारी  देव  झूठे  अवतार  जैसा  अधर्म  और  विकृती  है  वहाँ  ब्राहमिनो ने  मुलभारतिय  शुद्र  अस्पृष्य कहे  जाने  वाले  लोग  वर्ण  ही  नही  दुसरे  मुलभारतिय हिन्दूधर्मी  लोग  वैश्य  और  क्षत्रिय  को  भी  ग्यान  , गुरू  पद  से  वंचित  कर  दिया  है  !  य़हा  तक  की  शुद्र  वेद  ना  सुने  नही  तो  उनके  कान में  गर्म  शिशा  ड़ाले  एसा  ऊँहोने  उनके  धर्म  का  कानुन  बनाया  है  !  ग्यान  और  सत्य  की  खोज  पर  वहा  बन्दी  है  एसा  विचित्र  धर्म  संसार  में  अन्य  कोई  नही  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Saturday, 10 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 9

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध : बेलि  : 2 : 9

बेलि  : 2 : 9 

मन  बुधि  जहवाँ  न  पहुँचे ,  हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

मन  =  चाहत , इच्छा , तृष्णा , मोह ,  माया  ! बुधि  = विवेक  , ग्यान , परख  ! जहवाँ   = उस  जगह  ! न  पहुँचे  = ज़हाँ  नही  पहुँचे  ! हो  रमैया राम = हे  सज्जन  जनो  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  न  शिल  सदाचार  भाईचारा  समता  ममता  विश्वबंधुत्व एकेश्वर  निराकार  निर्गुण  तत्व  राम  को  मानता  है  न  मानव  की  बुद्धी  कर्तुत्व  को  महत्व  देता  है !  उसने  बडी  विचित्र  विचित्र  बाते  धर्म  के  नाम  पर  बताई  है  जैसे  वेद  और  ब्रह्मा  जो  मुख  भुजा  पेट  और  पाव  से  बच्चे  पैदा  करता  है  और  वर्ण  और  वर्णभेद  ऊचनीच  निर्माण  करता  है !   मनुस्मृती का  कानुन  जो  छुवाछुत  अस्पृष्यता  स्त्री  पुरूष  शोषण गुलामी  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा  को  धर्म  बताता  है !  इनके  लंपट  देवी  देवता , होम  हवन  जनेऊ   दारू  देवदासी  मन्दिर  की  वेश्या नर्तकी  , अवतार  और  असत्य नारायण  पूजा  कथा  आदी  सभी  मन  और  बुद्धी  के  परे  है  , समज  के  बाहर के  है !   इनकी  पाप  पुण्य  की  बाते ,  स्वर्ग  नरक  सब  कुछ  ब्राह्मण  के  फायदे  और  गैरब्राह्मण  के  शोषण  के  लिये  बने है !  कुल  मिलाकर  सब  कुछ  अमानविय  है  !  इन्होने  मानव  को  जनावर  बना दिया  मानव  जन्म  को  अपमानित  किया !  

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Friday, 9 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 8

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध  : बेलि  : 2 : 8

बेलि  : 2 : 8

परिहरि  जैबेहु  खेत , हो  रमैया  राम !

परिहरि  = पहरेदार , दुसरा  रखवालदार  ! जैबेहु   = रखना  , जाना  , देना  ! खेत  = मकान  , दुकान , धर्म  इत्यादी  !  हो  रमैया राम = हे  सज्जन  जनो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  जब  हम  अपना  किमती  घर  , दुकान , मकान , खेत , धर्म , संस्कृती  या  अन्य  अनमोल  वस्तु  को  दुसरे  के  पहरेदारी  पर  छोड  देते  है  तब  उसकी  हिफाजत  कितनी  होगी  इसकी  कोई  जमानत  नही  ले  सकता  वह  पुरी  तरह  पहरेदार की   ईमानदारी  चरित्र  उसका  अतित  चाल  चलन , शिल   सदाचार  का  उसका  आचरण  कर्तव्य परायणता  आदी  पर  निर्भर  करता  है  !  दुसरे  पर  भरोसा  करने  या  खुद  रखवालदारी  यही  दो  पर्याय  होते  है  !  कभी  चोर  ही  खेत  खा  जाता  है   !  कबीर साहेब  ने  देखा  मुलभारतिय  लोगोने  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्मी  लोगो  पर  भरोसा  किया  पर  वे  महाचोर  ऊचक्के  निकले !  ऊँहोने  मुलभारतिय  हिन्दू  लोगोंकी  संस्कृती  विरासत  मिलकियत  और  धर्म  देश  ही  हडप  कर  लिया  और  मालिक  को  ही  गुलाम  बना  लिया !  हे  मुलभारतिय हिन्दूधर्मी सज्जनो  जागो , जागते  रहो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण,अखण्ड हिन्दुस्तान,शिवशृष्टी

Thursday, 8 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 7

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि : 2 : 7

बेलि  : 2 : 7

गोबर  कोट  उठायेउ  , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

गोबर = गाय  ढ़ोर  का  गोबर  , मल , विष्ठा  ! कोट  = किला  , ढेर  , मकान  ! उठायेउ  = बनाया  ! हो  रमैया राम  = हे  सज्जन  लोगो  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद में  कहते है भाईयों  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  के  पंडे  पूजारी  धर्माचार्य  ने  पहले  वेद  फिर  मनुस्मृती , फिर देवता  उसके अवतार  और  मुर्ती  पूजा   आदी  सब  आजमाने  के  बाद   मुलभारतिय  लोग  कृषीप्रधान  होने  के  कारण  और  गाय  बैल  घोडे  की  होमहवन   बली   विरोधी  होने  के  कारण  विदेशी  ब्राह्मनोने  पवित्र  गाय  के  गोबार  और  गो  मुत्र  का  सहारा  लेकर  पंचगव्य  का  तिर्थ  बना  दिया  गोमाता  गोमुत्र  गोबर  का  सहारा  लेकर  वो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  में  घुस  गये  और  गोबर का किला  ही  मुलभारतिय  लोगो  को  लूटने  का  स्थान  बन  गया  ! गोबर  का  परकोट  किला  एसा बना  ! भाईयों  इस  से  बाहर  आवो  गाय  एक  उपयुक्त  प्राणी  है  उसका  दुध  दही  माखन  घी  तो  ठिक  है  पर  मल  मुत्र  खाने  योग्य  नही , उसे  भुमी  खेती  का  खाद बानावो  ,मानव  खाद्द  नही  ! ऐसे  अंध  विश्वासी  ना  बनो  की  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी आपको  बेवकुफ  बनाकर  लूटता  रहे  गो  दान  , स्वर्ण  गो  दान  , पशु  दान  मांग  कर  वो  गो  हत्या  गोमेध  करता  रहा  है  जो  अधर्म  है  , विकृती  है  , पाप  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान,शिवशृष्टी

Wednesday, 7 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 6

पवित्र बीजक  :  प्रग्या बोध  :बेलि  : 2 : 6

बेलि  : 2 : 6 

गुरू  दीहल  मोहि  थापि  , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

गुरू  =  शिक्षक !  दीहल  = दिया  ! थापि  = थोपा  ! हो  रमैया  राम =  सज्जन  जनो  !

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  के  लोगोने  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  पर  अपना  वेद  और  भेद  का  धर्म  ग्रंथ  और  मनुस्मृती  कानुन  का  जाती  वर्णवाद  ऊचनीच  भेदाभेद  छुवाछुत अस्पृष्यता  विषमता  का  नियम  स्थापित  कर  खुद  को  सर्वश्रेष्ठ  गुरू  ग्यानी  पंडित  पूजारी  घोषित  कर  सब  के  उपर  जबर्दस्ती  थोपा  !  खुद  को  कानुन  और  धर्मग्रंथ  का  अर्थ  बताने  वाला  घोषित  किया  ज़िस  पर  कोई  प्रतीवाद  नही  कर  सकता  और  कोई  करे  तो  उसे  उपर  प्रतीबंध , निष्कषण  , अस्पृष्यता  लाद  दी  गई  !  कुल  मिलाकर  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  स्थानिय  हिन्दू  लोगोंपर  अन्याय  पूर्वक  लादा  गाया  जैसे  वो  मानव  नही  जनावर  हो  ! उनके  बुद्धी  को  कुंठित  कर  मनोऋग्ण  और  गुलाम  बनाया  गया  और  ये  सब  ऊंके  धर्म   मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  नाम  से  ही  किया  गया ताकी  झूठ   का  उनको  पता  न  चले  !  इसे  हिन्दू  मान्यता  परम्परा भगवान  की  मर्जी  आदी  नाम  पर लादा  गया  !  कबीर  साहेब  ने  इसे  मानने  से  इंकार  कर  फिर  से  समता  शिल  सदाचार भाईचारा  का  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  पूनरस्थापित  किया  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Tuesday, 6 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 5

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि  : 2 : 5

बेलि  : 2 : 5 

ई  तो  है  वेद  शास्त्र , हो  रमैया  राम !

शब्द  अर्थ  : 

ई  = इनके  !    तो  है  = कहते  है  ! वेद  शास्त्र = वेद  और  मनुस्मृती इत्यादी  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि  के  इस पद में कहते है भाईयों ये  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्मी  लोग   बडे  अहंकार  के  साथ  बताते  है  की इनके   यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म  का  धर्म  ग्रंथ  वेद , शृती  और  मनु  स्मृती  आदी  स्मृतिया  है  ! वेद  मे  है  भेद   वर्णवाद  ऊचनीच ! लंपट  ब्रह्मा  को  देव  और  वेद  का  जनक  बताते  है  ! इस  लंपट  ब्रह्मा  के  मुख  से  ब्राह्मण  , भुजा  से  क्षत्रिय  , पेट  से  वैश्य  और  पाव  से  शुद्र  का  जन्म  हुवा  ऐसा  ये  बताते  है  ! इसने  होम  हवन  जनेऊ  संस्कार गाय  बैल  घोडे  आदी  की  होम  अग्नी  में  बली  देनेसे  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  के  देव  साक्षात सशारीर  होम  अग्नी  से  प्रगट  होते   है  एसा  ये  बताते  है  !  ये  ब्राह्मण  देवाता  मांसाहारी है  उनहे  सोमरस  दारू  बहुत  प्रिय  है  ये  नाच  गाना रंभा  ऊर्वशी आदी  का  नाच  गाना  देखते  रहते  है  और  इन  वेश्याये  को  मुलभारतिय  राजा  संत  आदी  को  रिझाने  भेजते  रहते है  , ये  लंपट तथास्तु बोलकर    इच्छित  वर  भी  देते  है  !  मनुस्मृती  ने  जातीवाद विषमाता  ऊचनीच  अस्पृष्यता  छुवाछुत  शोषण  गुलामी  स्त्री  का  तिरस्कार  और  शोषण  ,सतीप्रथा  , बाल  विवाह  लैंगिक  संबंध  और  शोषण  आदी  को    विदेशी  यूरेशियन वैदिक  धर्म   का  कानुन  बता  ये  एक  वर्ण  विदेशी  ब्राह्मण अन्य  सभी  गैरब्राह्मण अपनेसे निचे , तुच्छ , गुलाम  बताते  है  ! 

इन  विदेशी  यूरेशियान वैदिक ब्राहमिनो  ने  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  समाज  का पुरा  बेडा  गर्क  कर  दिया  ! विषमाता शोषण  को ही  ये  धर्म  संस्कृती  बताते  है  ज़िसे  परमात्मा  कबीर सिरे  से  खारीज  कर  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म और  मुलभारतिय हिन्दूधर्म को  अलग  अलग  बताते  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Monday, 5 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 4

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 4

बेलि : 2 : 4

सो रे कियेहु विश्वास , हो रमैया राम ! 

शब्द अर्थ : 

सो रे = वह ! कियेहु विश्वास = भरोसा किया , मान्यता दी ! हो रमैया राम = राम को मानने वाले ! 

प्राग्या बोध :  

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों तुम तो राम को मानने वाले मुलभारतिय हिन्दुधर्मी हो , शिल सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व एकेश्वर निराकार निर्गुन चेतन तत्व राम को मानने वाले हो ! जाती वर्ण ऊचनीच भेदाभेद छुवाछुत अस्पृष्यता शोषण गुलामी पुंजीवाद वसाहतवाद अंधश्रद्धा जनेऊ सोवला लंपट ब्रह्मा विष्णु इन्द्र आदी ब्राह्मण देवता को न मानने वाले सिंधु हिन्दू धर्म संस्कृती के आदिवाशी लोग हो फिर तुमने विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म जो मुलता तुम्हारे अहित मे है उसे क्यू मानते हो ? कितने नादान भोले हो तुम अपना हित अहित नही पहचानते , शत्रू मित्र नही पहचानते ! धर्म अधर्म नही पहचानते , संकृति विकृती नही पहचानते ! भाई ये तो मूर्खता होगी ! इतने मूर्ख अंधविश्वासी ना बनो ! इस मूर्खता से बाहर आवो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती मुलभारतिय  
हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Sunday, 4 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 3

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध  : बेलि  : 2 : 3

बेलि  : 2 : 3

सो  तो  है  बंसी  कसी  , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

सो  तो  है  = वह  तो  है !   बंसी  कसी  = बावन  कसी  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  हमे  अच्छी  तरह  सोच  समझकर  और  खरी  खोटी  जांच  कर  कुछ  कसौंटीया  लगाकर  ही  वस्तु  हो  य़ा  जीवन  धर्मग्यान  लेना  चाहिये  जैसे  सोना  हम  लेते  है  बावन  कसी  शुद्ध  सोना  वैसे  ही  धर्म की  परख  होनी  चाहिये  ! साधु  संतो  बतावो  क्या  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म जो  वेद  और  भेद  जाती  और  वर्ण मनुस्मृती  ऊचनीच  भेदाभेद  अस्पृष्यता  शोषण  छुवाछुत  गुलामी पुंजीवाद वसाहतवाद अंधश्रद्धा जनेऊ सोवला बालात्कारी  ब्रह्मा  विष्णु इन्द्र   आदी  को  देव  मानता  है  हत्या  बली  दारू  , नाच  गाना  धिंगाना  देवदासी  स्त्री  शोषण लंपटवृती  को  धर्म  मानना  चाहिये  या  अधर्म  ? संस्कृती  मानना  चाहिये  या  विकृती  ?  भाईयों  परख  करना  सिखो   ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Saturday, 3 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 2

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि  : 2 : 2

बेलि  : 2 : 2

धोखे  कियेउ  विश्वास  , हो  रमैया राम  !

शब्द  अर्थ  : 

धोखे  = धोखेबाज , अविश्वासनिय  , भरोसे  के  काबिल  नही  ! कियेउ  = किया  ! विश्वास = भरोसा ! 

प्रग्या बोध  :   

परमात्मा कबीर बेलि  के इस पद में कहते है भाईयों  भरोसा करना ,  विश्वास  करना  अच्छी  बात  है  पर  जो  बार  बार  भरोसा  तोडे  एसे  जग  विख्यात  अविश्वनीय  लोगों  पर  विश्वस  कर  अंध  भक्त  हो  कर  अपना  अनमोल  मानव  जीवन  लगाना मूर्खता  होगी  जैसे  की  विदेशी  ब्राह्मण  पर  कभी  भरोसा नही  किया  जा  सकता  वो  स्वाभव  से  ही  बडा  झूठा  मक्कार  और  लालची  है  उसमे  वर्ण  का  अहंकार  कुट  कुट कर  भरा  पडा  है  वह  भ्रम  और  भ्रामक   कथा  कहानिया  बनाकर लोगोंसे  दान  दाक्षिना  एटता  है  ! उसका  वैदिक  यूरेशियन  ब्राह्मणधर्म   और  मनुस्मृती  का  उसका  कानुन  ही  अधर्म  पाप  झूठ  मक्कारी  विकृती  असमानता  गैर  बारबरी  ऊचनीच  भेदाभीद  अस्पृष्यता  छुवाछुत  को  धर्म  बताता  है  , अवतार  , प्राणप्रतिष्ठा  असत्य नारायण  कथा   पाठ  पूजा  होम हवन  बली  दारू  देवदासी  प्रथा   बाल  बिवाह , सती  प्रथा  से  स्त्री  शोषण  के  लिये  जग  विख्यात   है  !  एसे  विकृत  संस्कृती  और  अधर्म  से  भरे  पापी  ब्राह्मण  पर  भरोसा  करना  ही  महामूर्खता  है  ! इस  से  बचो  अपने मुलभारतिय हिन्दुधर्म का  पालन करो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  कल्याण  ,अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Thursday, 1 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 30

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 30

बेलि  : 1 : 30

परखि  लेहु  खरा  खोट  , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

परखि  = परख  कर  , कसौंटीया  लगाना  ! लेहु  = लेना  ! खरा  खोट  = खरा  खोटा , सत्य  असत्य  , असली  नकली  ! हो रमैया राम = हे  राम  जानने  वाले  साधु  संतो  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते है भाईयों खरा  धर्म  खोटा  धर्म  मे  परख  करो  , सत्य  असत्य  में  परख  करो , असली  नकली  में  परख  करो  जैसे  सोने  के  लिये  कुछ  कसौंटीया  लगाई  जाती  है  वैसे  ही  धर्म  अधर्म  की  कुछ  पहचान  है  ! जहाँ  शिल  सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व सत्य  अहिंसा है  वो  धर्म  है  ! जहाँ  वर्ण  जातीवाद  अस्पृष्यता  विषमता  छुवाछुत  शोषण  गुलामी  झूठ  मक्कारी  बली  हत्या  सोमरस  दारू  लंपट  देव  , ईश्वर  अवतार  , वसाहत  वाद  पुंजी  वाद  ब्राह्मण  वाद  मनुवाद  वेद  और  भेद  , सोवला जनेऊ   झूठा  असत्य  नारायण  पूजा  पाठ  होम  हवन  है  सब  अधर्म  और  विकृती  है  ! इस  कसौंटीया   पर  परखो  तो  स्पस्ट  हो  जयेगा   विदेशी  यूरेशियन वैदिक  ब्राह्मणधर्म धर्म  नही  अधर्म  है  , संस्कृती  नही  विकृती है  ! 

मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  शिल  सदाचार  भाईचारा समता  ममता  विश्वबंधुत्व  एकेश्वर  निराकार  निर्गुण चेतन  तत्व  राम को  मानने  वाला  धर्म  है  जो  भारत  का  आद्य आदिवाशी सनातन पुरातन लोकधर्म  है  जो  विश्व  का  पहला  धर्म  है  जो  सिंधु  हिन्दू  संस्कृती  के  पूर्व  से  चला  आ  रहा  नागवंशी लोगोंका  धर्म  है  ज़िसने  सिंधु  हिन्दू  संस्कृती  नागरिक  अधिकार  वेवस्था   गणराज्य  की  निर्मिती  की  ज़िसका  आधार  ही  समता  रहा  है  !   

मुलभारतिय  हिन्दूधर्म और  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अलग  अलग  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी