Sunday, 18 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 1

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : प्रकरण नवम : बिरहुली 

 पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 1

आदि अन्त नहिं होते बिरहुली 
नहिं जर पल्लव डार बिरहुली ! 

शब्द अर्थ : 

आदी अन्त = शुरू और आखिर ! नही होते = 
ना थे ! बिरहुली = बाहारी , दुसरा , जग , शृष्टी ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों वह परमतत्व निराकार निर्गुण चेतन तत्व राम परमात्मा केवल एक है , वही एकमात्र निर्माता मालक चालक है ! जब ये पेड पौंधे डाल फुल फल मुल बीज कुछ नही थे तब भी वह एक मात्र तत्व चेतन राम था ! शुरू में भी वही है और अंत में भी वही इस बात को समझो ! सब कुछ वही है सब कुछ दृष्य अदृष्य उसी में है ! उस परम तत्व चेतन राम का स्मरण करो , उसी को नमन करो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

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