पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 1
आदि अन्त नहिं होते बिरहुली
नहिं जर पल्लव डार बिरहुली !
शब्द अर्थ :
आदी अन्त = शुरू और आखिर ! नही होते =
ना थे ! बिरहुली = बाहारी , दुसरा , जग , शृष्टी !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों वह परमतत्व निराकार निर्गुण चेतन तत्व राम परमात्मा केवल एक है , वही एकमात्र निर्माता मालक चालक है ! जब ये पेड पौंधे डाल फुल फल मुल बीज कुछ नही थे तब भी वह एक मात्र तत्व चेतन राम था ! शुरू में भी वही है और अंत में भी वही इस बात को समझो ! सब कुछ वही है सब कुछ दृष्य अदृष्य उसी में है ! उस परम तत्व चेतन राम का स्मरण करो , उसी को नमन करो !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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