Wednesday, 21 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 4

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  बिरहुली  : 1 : 4

बिरहुली  : 1 : 4

मास  असारे  शीतल  बिरहुली 
बोइनि  सातों  बीज  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

मास  = महिने  ! असारे  = सभी  ! शीतल  = अनुकुल  , ठंड  ! बोइनि  = बुवाई , लगाना  ! सातों  = सभी  प्रकार  के !  बीज  = जन्म  उगम  का  स्त्रोत  , मुल  बीज  !  बिरहुली  = शृष्टी  , जग  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  निराकार  निर्गुण  चेतन  तत्व  राम  ने  शृष्टी के  निर्मांण   के  लिये  सभी  काल  अनुकुल  बनाये  जो  बीज  को  धारण  कर  विविध  प्रकार  के   पेड  पोंधे  बेल  त्रूण   घास  फुल और  कन्द  मुल  वाले  अनाज  पैदा  किये  ज़िस  से  पृथ्वी  के  जीव  जन्तु  प्राणी  पशु  पक्षी  जलचर  थलचर  किट  फ्तंग  सब  का  उदर  निर्वाह  हो, भरण  पोषण हो  अन्न  जल  वायू  शितलता  और  धुप  मिले  ताकी  ऋतु  अनुसार  जीवन  चक्र  बना  रहे  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

No comments:

Post a Comment