Wednesday, 28 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 11

पवित्र बीजक : प्रग्या  बोध  : बिरहुली  : 1 : 11

बिरहुली  : 1 : 11

विष  की  क्यारी  तुम  बोयहू  बिरहुली 
अब  लोढ़त  का  पछिताहु  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

विष  की  क्यारी  = विष  की  गुठली  ! तुम  बोयहू  = तुमने  बोया  है  ! अब  लोढ़त = अब  उसके  फल  !  पछिताहु  = पच्छाताप  करना  ! बिरहुली  = संसार , जग  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  जैसा  कर्म  करोगे  वैसा  ही  फल  पावोगे ! आम  की  गुठली   बोवोगे  तो  आम  का  वृक्ष  ही  ऊगेगा  बडा  होगा  छाव  फल  देगा !   पर  काटे  भरे  विशैले  और  पत्ते  रहित  किसी  काकटस  का  पेड  लगवोगे  तो  वह  सुखद  छाव  कहासे  देगा ?   उसके  निचे  तुम  कैसे  सुख  से  विश्राम  आराम  कर  पावोगे  ,  कैसे  तुमहे  उसके  निचे  चैन  की  निन्द  आयेगी  ! विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  यह  विष  और  काटे  वाला  बिना  छाव  का  ही  धर्म  है  , वहा  मानव  कल्यान  कहासे  मिलेगा  ? 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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