पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 11
बिरहुली : 1 : 11
विष की क्यारी तुम बोयहू बिरहुली
अब लोढ़त का पछिताहु बिरहुली !
शब्द अर्थ :
विष की क्यारी = विष की गुठली ! तुम बोयहू = तुमने बोया है ! अब लोढ़त = अब उसके फल ! पछिताहु = पच्छाताप करना ! बिरहुली = संसार , जग !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल पावोगे ! आम की गुठली बोवोगे तो आम का वृक्ष ही ऊगेगा बडा होगा छाव फल देगा ! पर काटे भरे विशैले और पत्ते रहित किसी काकटस का पेड लगवोगे तो वह सुखद छाव कहासे देगा ? उसके निचे तुम कैसे सुख से विश्राम आराम कर पावोगे , कैसे तुमहे उसके निचे चैन की निन्द आयेगी ! विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म यह विष और काटे वाला बिना छाव का ही धर्म है , वहा मानव कल्यान कहासे मिलेगा ?
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
No comments:
Post a Comment