Thursday, 8 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 7

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि : 2 : 7

बेलि  : 2 : 7

गोबर  कोट  उठायेउ  , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

गोबर = गाय  ढ़ोर  का  गोबर  , मल , विष्ठा  ! कोट  = किला  , ढेर  , मकान  ! उठायेउ  = बनाया  ! हो  रमैया राम  = हे  सज्जन  लोगो  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद में  कहते है भाईयों  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  के  पंडे  पूजारी  धर्माचार्य  ने  पहले  वेद  फिर  मनुस्मृती , फिर देवता  उसके अवतार  और  मुर्ती  पूजा   आदी  सब  आजमाने  के  बाद   मुलभारतिय  लोग  कृषीप्रधान  होने  के  कारण  और  गाय  बैल  घोडे  की  होमहवन   बली   विरोधी  होने  के  कारण  विदेशी  ब्राह्मनोने  पवित्र  गाय  के  गोबार  और  गो  मुत्र  का  सहारा  लेकर  पंचगव्य  का  तिर्थ  बना  दिया  गोमाता  गोमुत्र  गोबर  का  सहारा  लेकर  वो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  में  घुस  गये  और  गोबर का किला  ही  मुलभारतिय  लोगो  को  लूटने  का  स्थान  बन  गया  ! गोबर  का  परकोट  किला  एसा बना  ! भाईयों  इस  से  बाहर  आवो  गाय  एक  उपयुक्त  प्राणी  है  उसका  दुध  दही  माखन  घी  तो  ठिक  है  पर  मल  मुत्र  खाने  योग्य  नही , उसे  भुमी  खेती  का  खाद बानावो  ,मानव  खाद्द  नही  ! ऐसे  अंध  विश्वासी  ना  बनो  की  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी आपको  बेवकुफ  बनाकर  लूटता  रहे  गो  दान  , स्वर्ण  गो  दान  , पशु  दान  मांग  कर  वो  गो  हत्या  गोमेध  करता  रहा  है  जो  अधर्म  है  , विकृती  है  , पाप  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान,शिवशृष्टी

No comments:

Post a Comment