Tuesday, 27 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 10

पवित्र  बीजक  : प्रग्या बोध  : बिरहुली  : 1 : 10

बिरहुली  : 1 : 10

विषहर  मंत्र  न  मानै  बिरहुली 
गारूड़  बोले  अपार  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

विषहर  = विष  हो  हरने  वाला , विष  का  असर  नष्ट करने  वाला , सच्चा  धर्म ग्यानी   !  मंत्र  = धर्म  ग्यान  ! न  मानै  = न  जानना  ! गारूड  = खुद  को  सपेरा  कहने  वाला  धर्म  ग्यानी  ! बोले  अपार  = बहुत  थोता  ग्यान  बाटता  है  ! बिरहुली = माया  गस्त  जग  संसार  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों इस  मोह  माया  इच्छा  तृष्णा  वासना कामना  लालच  भरे  जहर  भरे  संसार  में  जहर  ऊतारने  वाले  सच्चे  धर्म  ग्यानी   मांत्रिक  बहुत  कम  है  ! अधिकतर  लोग  बहुत  व्यर्थ  की  बडबड  करते  है  जैसे  की  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्मी पांडे  पंडित  पूजारी  ! इन का  खुद का  धर्म  जहर  भरा  वर्ण  जाती  वादी  वेद  और  मनुस्मृती  का  विष  भरा  अधर्म  और  विकृती  है  जो  ऊचनीच  छुवाछुत  अस्पृष्यता  गाय  बैल  घोडे  की  बैल  वाला  होमहवन  दारू देवदासी स्त्रीशोषण सतीप्रथा बलात्कारी  ब्रह्मा  आदी  जहर  से  भरा पडा  है  और  वे  इसी  जहर  का  गुणगान  करते है  एसे  थोते  पंडित  आप  का  क्या  भला  करेंगे  जो  खुद  जहर  भरे  लोग है  !

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

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