पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 8
बिरहुली : 1 : 8
सो फुल लोढ़े सन्त जना बिरहुली
बन्दि के राउर जाय बिरहुली !
शब्द अर्थ :
सो फुल = वही परिणाम ! लोढ़े = पसंद ! सन्त जाना = विचारी लोग , साधु , सभ्य ! बन्दि के = बन्धन के ! राउर = राजा , धनी ! जाय बिरहुली = मोह माया ग्रस्त होना !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों सन्त साधु प्रवृत्ती के लोग मोह माया भरे संसार से दुर रहते है, उसके परिणाम जानते है ! पर धनवान राजा तो बस सत्ता और अधिक संपत्ती के मोह में अंधे हो जाते है ! बिरले कुछ लोग है जो राजा धनी होते हुवे भी जागृत होते है और अपनी सत्ता संपत्ती का उपयोग धर्म प्रचार प्रसार और खुद धार्मिक जीवन बिताने मे करते है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
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