Sunday, 25 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 8

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली  : 1 : 8

बिरहुली  : 1 : 8 

सो  फुल  लोढ़े  सन्त  जना  बिरहुली 
बन्दि  के  राउर  जाय  बिरहुली   ! 

शब्द  अर्थ  : 

सो  फुल  =  वही  परिणाम  !  लोढ़े  = पसंद  ! सन्त  जाना  = विचारी  लोग  , साधु , सभ्य  ! बन्दि के   = बन्धन  के   !  राउर  = राजा  , धनी  ! जाय  बिरहुली  = मोह  माया  ग्रस्त  होना  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  सन्त  साधु  प्रवृत्ती  के  लोग  मोह  माया  भरे  संसार  से  दुर  रहते  है,  उसके  परिणाम  जानते  है  !  पर  धनवान  राजा  तो  बस  सत्ता और   अधिक  संपत्ती  के  मोह  में  अंधे  हो  जाते  है !   बिरले  कुछ  लोग  है  जो  राजा  धनी  होते  हुवे  भी  जागृत  होते  है  और  अपनी  सत्ता  संपत्ती  का  उपयोग  धर्म  प्रचार  प्रसार  और  खुद   धार्मिक  जीवन  बिताने  मे  करते  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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