#विदेशी_यूरेशियन_वैदिक_ब्राह्मणधर्म_गुरू_परम्परा !
विदेशी युरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के गुरू की परम्परा ब्रह्मा , ब्रिहस्पती , मनु से वशिष्ठ तक आते आते दम तोड चुकी थी मौर्य सम्राट संप्रती यानी राम और उनके रिस्तेदार नन्द कृष्ण के काल तक ब्राह्मण बहुत कमजोर हुवे थे और जैंन बौद्ध गुरू परम्परा मजबुत हुवी थी ! बौद्ध और जैंन धर्म और मुलभारतिय हिन्दूधर्म के साधु संतोने वैदिक ब्राह्मणधर्म मानने से इंकार किया और वैदिक ब्राह्मणधर्म मुठ्ठी भर ब्राहमिनो मे सीमित रह गया और ब्राह्मण गुरू न के बराबर हुवे 7 - 8 शताब्दी में कोई ब्राह्मण धर्मग्रंथ नही था जब की बौद्ध जैंन धर्म ग्रंथ विपुल थे !
तुर्की धर्मी आक्रमण शुरू हुवे यही मौका देख कर विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी लोगो ने तुर्की धर्मी आक्रमको से हाथ मिलाकार जैंन बौध हमुलभारतिय हिन्दू मन्दिर मठ ज़िनालय तुडवाये आग लगवायी और और नस्ट करने में भाग लिया ! यह छूपकर किया गया वार था !
इसी समय कुछ ब्राह्मण काशी मे ईकठ्ठा हुवे और एक नवजवान केरली बच्चे को आगे कर बौद्धो के मठ अपने कबजे मे करने .की योजना बनाई गई और आज के वैदिक ब्राह्मणधर्म चार शंकराचार्य मठ बने बनाये बौध मठ को तुरकी शाषकों से संरक्षण मांगा ! बौध जैंन मुलभारतिय हिन्दू धर्म मे पलायन हुवा आचार्य गुरू न रहे और संकराचार्य के चेले ब्राह्मण ग्रंथो निर्मिती बौध जैंन हिन्दू धर्म मान्यता आदी की चौरी करते हुवे की गयी , 7 से 10 शताब्दी का यही वह काला युग है !
शंकारचार्य की नौटंकी वहा से शुरू हुवी ! आज जो ब्रह्मसुत्त , अद्वैत , वेदांत का दर्शन संकराचार्य दे रहे है वह मुलता बौद्ध जैंन दर्शंन है ज़िसे बौध गाथा आदी मे देखा जा सकता है पर ब्राहमिनोने अपना मूर्खता भरा वैदिक ब्राह्मणधर्म के विकृत स्वरूप वर्ण जाती भेदभाव अस्पृष्यता विषमता छुवाछुत शोषण जनेऊ सोवला होमहवन शेंदी कटोरी आदी बनाये रखा और कभी भी हिन्दू जैंन बौद्ध नही बने जो बने दीखावटी बने और मौका मिलते ही हम ब्राह्मण है कहते रहे !
आज जो संकराचार्य है वह वैदिक ब्राह्मणधर्म के आचार्य है मुलभारतिय हिन्दूधर्म के नही ! आज जैंन धर्म और बुद्ध धर्म के आचार्य भी देखे जाते है और अन्य धर्मोके भी आचार्य है !
मुलभारतिय हिन्दूधर्म की परमात्मा कबीर ने 14 - 15 शताब्दी मे पुनरस्थापित किया ज़िसका एकमात्र धर्मग्रंथ है कबीर वाणी पवित्र बीजक और कानुन है हिन्दू कोड बिल के कायदे और धर्मपीठ है मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान कल्याण ज़िसका दौलतराम जगतगुरू है !
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