Tuesday, 20 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 3

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध :  बिरहुली  : 1 : 3

बिरहुली  : 1 : 3

ब्रह्मादिक  सनकादिक  बिरहुली 
कथि  गये   योग  अपार  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

ब्रह्मादिक  = ब्रह्मा  इत्यादी  ! सनकादिक  = सनक , संन्दन  आदी  बाल  कुमार  ! कथि  गये  = कहकर  गये , बताकर  गये  ! योग  अपार  = अनेक  योगी  जैसे  गोरखनाथ  आदी  ! बिरहुली  = संसार  , शृष्टी  यह  जग  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  यूरेशियन वैदिक  ब्राह्मणधर्म  के  ब्रह्मा  उनके  मनु  आदी  ने  वर्ण  जाती  भेदभाव अस्पृष्यता  विषमाता  आदी  वेवस्था बनाई  अधर्म  और  विकृती  को  धर्म  और  संस्कृती  बताई  !  लोग  जब  अविश्वास  करने  लगे  तो  बाल  ब्रह्मचारी  सनक  संन्दन  आदी  की  नौटंकी  करा  दी  , शृती  स्मृती  होम  हवन  जनेऊ  आदी  बेकार  बातो  के  बाद  अवतार  प्राणप्रतिष्ठा  असत्य नारायण आदी  अंधश्रद्धा  निर्मांण  किया !  कारोडो  देव  और  उनके अवतार  मन्दिर  से  लोगो  की  लूटमार  होते  रही !   फिर  अरण्यक  वेदांत  के  नाम  से  उल्लू  बनाते  रहे !   बिच  मे  योग  हटयोग  से  लोगोंको  डराते  रहे  और  अब  सनातन  सनातन  कर  अपने  पाप  छूपा रहे  है  जब  की  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म ना  तो  सनातन  है  नाही पुरातन  ! वास्तव  मे  वो  धर्म  है  ही  नही  शैतान की  नौटंकी  विकृती  और  अधर्म  है ,  इस  से  संसार  मे  जग  मे  मानव  सुखी  होना  असंभव  है  !  

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म  विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

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