Saturday, 10 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 9

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध : बेलि  : 2 : 9

बेलि  : 2 : 9 

मन  बुधि  जहवाँ  न  पहुँचे ,  हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

मन  =  चाहत , इच्छा , तृष्णा , मोह ,  माया  ! बुधि  = विवेक  , ग्यान , परख  ! जहवाँ   = उस  जगह  ! न  पहुँचे  = ज़हाँ  नही  पहुँचे  ! हो  रमैया राम = हे  सज्जन  जनो  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  न  शिल  सदाचार  भाईचारा  समता  ममता  विश्वबंधुत्व एकेश्वर  निराकार  निर्गुण  तत्व  राम  को  मानता  है  न  मानव  की  बुद्धी  कर्तुत्व  को  महत्व  देता  है !  उसने  बडी  विचित्र  विचित्र  बाते  धर्म  के  नाम  पर  बताई  है  जैसे  वेद  और  ब्रह्मा  जो  मुख  भुजा  पेट  और  पाव  से  बच्चे  पैदा  करता  है  और  वर्ण  और  वर्णभेद  ऊचनीच  निर्माण  करता  है !   मनुस्मृती का  कानुन  जो  छुवाछुत  अस्पृष्यता  स्त्री  पुरूष  शोषण गुलामी  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा  को  धर्म  बताता  है !  इनके  लंपट  देवी  देवता , होम  हवन  जनेऊ   दारू  देवदासी  मन्दिर  की  वेश्या नर्तकी  , अवतार  और  असत्य नारायण  पूजा  कथा  आदी  सभी  मन  और  बुद्धी  के  परे  है  , समज  के  बाहर के  है !   इनकी  पाप  पुण्य  की  बाते ,  स्वर्ग  नरक  सब  कुछ  ब्राह्मण  के  फायदे  और  गैरब्राह्मण  के  शोषण  के  लिये  बने है !  कुल  मिलाकर  सब  कुछ  अमानविय  है  !  इन्होने  मानव  को  जनावर  बना दिया  मानव  जन्म  को  अपमानित  किया !  

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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