Thursday, 1 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 30

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 30

बेलि  : 1 : 30

परखि  लेहु  खरा  खोट  , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

परखि  = परख  कर  , कसौंटीया  लगाना  ! लेहु  = लेना  ! खरा  खोट  = खरा  खोटा , सत्य  असत्य  , असली  नकली  ! हो रमैया राम = हे  राम  जानने  वाले  साधु  संतो  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते है भाईयों खरा  धर्म  खोटा  धर्म  मे  परख  करो  , सत्य  असत्य  में  परख  करो , असली  नकली  में  परख  करो  जैसे  सोने  के  लिये  कुछ  कसौंटीया  लगाई  जाती  है  वैसे  ही  धर्म  अधर्म  की  कुछ  पहचान  है  ! जहाँ  शिल  सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व सत्य  अहिंसा है  वो  धर्म  है  ! जहाँ  वर्ण  जातीवाद  अस्पृष्यता  विषमता  छुवाछुत  शोषण  गुलामी  झूठ  मक्कारी  बली  हत्या  सोमरस  दारू  लंपट  देव  , ईश्वर  अवतार  , वसाहत  वाद  पुंजी  वाद  ब्राह्मण  वाद  मनुवाद  वेद  और  भेद  , सोवला जनेऊ   झूठा  असत्य  नारायण  पूजा  पाठ  होम  हवन  है  सब  अधर्म  और  विकृती  है  ! इस  कसौंटीया   पर  परखो  तो  स्पस्ट  हो  जयेगा   विदेशी  यूरेशियन वैदिक  ब्राह्मणधर्म धर्म  नही  अधर्म  है  , संस्कृती  नही  विकृती है  ! 

मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  शिल  सदाचार  भाईचारा समता  ममता  विश्वबंधुत्व  एकेश्वर  निराकार  निर्गुण चेतन  तत्व  राम को  मानने  वाला  धर्म  है  जो  भारत  का  आद्य आदिवाशी सनातन पुरातन लोकधर्म  है  जो  विश्व  का  पहला  धर्म  है  जो  सिंधु  हिन्दू  संस्कृती  के  पूर्व  से  चला  आ  रहा  नागवंशी लोगोंका  धर्म  है  ज़िसने  सिंधु  हिन्दू  संस्कृती  नागरिक  अधिकार  वेवस्था   गणराज्य  की  निर्मिती  की  ज़िसका  आधार  ही  समता  रहा  है  !   

मुलभारतिय  हिन्दूधर्म और  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अलग  अलग  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

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