पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 8
बेलि : 2 : 8
परिहरि जैबेहु खेत , हो रमैया राम !
परिहरि = पहरेदार , दुसरा रखवालदार ! जैबेहु = रखना , जाना , देना ! खेत = मकान , दुकान , धर्म इत्यादी ! हो रमैया राम = हे सज्जन जनो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों जब हम अपना किमती घर , दुकान , मकान , खेत , धर्म , संस्कृती या अन्य अनमोल वस्तु को दुसरे के पहरेदारी पर छोड देते है तब उसकी हिफाजत कितनी होगी इसकी कोई जमानत नही ले सकता वह पुरी तरह पहरेदार की ईमानदारी चरित्र उसका अतित चाल चलन , शिल सदाचार का उसका आचरण कर्तव्य परायणता आदी पर निर्भर करता है ! दुसरे पर भरोसा करने या खुद रखवालदारी यही दो पर्याय होते है ! कभी चोर ही खेत खा जाता है ! कबीर साहेब ने देखा मुलभारतिय लोगोने विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी लोगो पर भरोसा किया पर वे महाचोर ऊचक्के निकले ! ऊँहोने मुलभारतिय हिन्दू लोगोंकी संस्कृती विरासत मिलकियत और धर्म देश ही हडप कर लिया और मालिक को ही गुलाम बना लिया ! हे मुलभारतिय हिन्दूधर्मी सज्जनो जागो , जागते रहो !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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