पवित्र बीजक प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1
हिण्डोला : 1 : 1
भरम हिण्डोला झूले , सब जग आय !
शब्द अर्थ :
भरम = भ्रम , अग्यान ! हिण्डोला = भवचक्र ! झूले = झुलना , पालना मे झुलना ! सब = सब लोग ! जग = शृष्टी ! आय = जन्म लिया !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों इस संसार मे हर कोई केवल झुला झुलने के लालच मे जन्म लेकर आया है ! पर वो नही जानता है यह भ्रम है ! क्यू की वह कोई सामान्य झुला नही है , वह भवचक्र यानी एसा झुला है जो कर्म फल के आधार पर चलता है और उसी के मुताबिक आप को झोका देता है ! कभी उपर कभी निचे ! कभी आनन्द कभी डर ! कभी अधिक झुलने की लालसा आपको झुले से निचे ऊतरने नही देती ! और कर्म फल आपको झुलाता रहता है जन्म मृत्यू के भवचक्र में ! वही समझदार है जो इसके कार्य को ठिक से समझते है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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