Saturday, 31 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 1

पवित्र बीजक प्रग्या बोध : हिण्डोला  : 1

हिण्डोला  : 1 : 1

भरम  हिण्डोला  झूले , सब  जग  आय  ! 

शब्द  अर्थ  : 

भरम  = भ्रम , अग्यान  ! हिण्डोला  = भवचक्र !   झूले  = झुलना  , पालना मे  झुलना  ! सब = सब  लोग  !   जग   = शृष्टी   ! आय  = जन्म  लिया  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  इस  संसार  मे  हर  कोई  केवल झुला  झुलने  के  लालच  मे  जन्म  लेकर  आया  है  !  पर  वो  नही  जानता   है  यह  भ्रम  है !   क्यू  की  वह  कोई  सामान्य  झुला  नही  है ,  वह भवचक्र  यानी  एसा  झुला  है  जो  कर्म  फल  के  आधार  पर चलता  है  और  उसी  के  मुताबिक  आप  को  झोका  देता  है  !  कभी  उपर  कभी  निचे  ! कभी  आनन्द  कभी  डर  !  कभी  अधिक  झुलने  की  लालसा  आपको  झुले  से  निचे  ऊतरने  नही  देती  ! और  कर्म  फल  आपको  झुलाता  रहता  है  जन्म  मृत्यू  के  भवचक्र  में  !   वही  समझदार  है  जो  इसके  कार्य  को  ठिक  से  समझते  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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