Monday, 2 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 2

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध  : हिण्डोला  : 1 : 2

हिण्डोला  : 1 : 2

पाप  पुण्य  के  खम्भा दोऊ  , मेरू  माया  माँहि ! 

शब्द  अर्थ  : 

पाप  पुण्य  =  कर्म  फल  ! खाम्भा  दोऊ  = दो  आधार  !  मेरू  = बिच  मे  ! माया  = मोह  ! माँहि  = अहंकार  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  माया  मोह  अहंकार  कर्म  का  झुला  झुलते  है  और  उसका  फल  होता  है  पाप  पुण्य  ! यही  पाप  पुण्य  सुख  और  दुख  अगला  हर  पल  जन्म  निच्छित  करते  हुवे  भवचक्र  यह  झुला  आप  को  निरंतर  झुलता  रहता  है  ! इस  से  बाहर  वही  निकल  सकता  है  जो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  का  एक  मात्र  धर्मग्रंथ  कबीरवाणी  पवित्र  बीजक  में  बताया  शिल  सदाचार भाईचारा  समता  ममता विश्वबंधुत्व  एकेश्वर  निराकार  निर्गुण  चेतन  तत्व  राम  के  सत्यधर्म  समताधर्म  का पालन  करता  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

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