Tuesday, 3 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 4

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  हिण्डोला  : 1 : 4

हिण्डोला  : 1 : 4

शुभ  अशुभ  बनाये  ड़ाँड़ी , गहे  दूनों  पानि  ! 

शब्द  अर्थ  : 

शुभ  अशुभ  = ऊचित  अनुचित  !  बनाये  ड़ाँड़ी  = बनाये  आधार  ! गहे  दूनों  पानि  = दोनो  पानि  मे  गये ,  गंगा  नहाने  जैसे  सोपस्कार   ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  शुभ  अशुभ  के  दो  ड़ण्डो  का  आधार  लेकार  वैदिक  ब्राह्मणधर्मी  लोगोने  धन्धा  किया  और  गंगा  नहाने  से  पाप  मुक्त  होता  है  एसा  सोपस्कार  बना  ड़ालां  जब  की  कोई  भी  पानी  अधर्म  को  शुद्ध  नही  कर  सकता  उसके  परिणाम  भुगातने  ही  पडते  है !  इस  लिये  शिल  सदाचार  का  धर्म  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  का  पालन करना  ही  ऊचित  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ  प्रतिष्ठान, कल्याण,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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