पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1 : 14
हिण्डोला : 1 : 14
शशि सूर रैनि शारदी , तहाँ तत्व परलय नाहिं !
शब्द अर्थ :
शशि = चन्द्र ! सूर = सूर्य ! रैनि = पानी ! शारदी = आवाज , ध्वानी तरंग ! तहाँ = वहाँ ! तत्व = नियम ! परलय = मृत्यू , अंत , दुख्ख ! नाहिं = नही है !
प्रग्या बोध :
परमात्मा काबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों मै उस जगह आपको लेकार जाना चाहता हूँ जहाँ न चन्द्र है न सूर्य और तारे , न पानी न हवा न ध्वनी न तरंग न वहाँ प्रलय है न नियम न जन्ममृत्यू का भय ना सुख और दुख ना इच्छा न तृष्णा ! केवल परम शांती , परम आनन्द ! अभय ! वो जगह है चेतन तत्व राम का निजधाम ! परमात्मा कबीरस्थान की निर्मल कुटी , मोक्ष , निर्वांण , निज दौलत ! और उसका मार्ग है मेरा बताया हुवा सदधर्म समताधर्म सत्यधर्म सनातन पुरातन आद्यधर्म लोकधर्म आदिवाशीधर्म मुलभारतिय हिन्दूधर्म !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
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