Friday, 13 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 14

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1 : 14 

हिण्डोला  : 1 : 14 

शशि  सूर  रैनि  शारदी  , तहाँ  तत्व  परलय  नाहिं  ! 

शब्द  अर्थ  : 

शशि = चन्द्र  ! सूर  = सूर्य  ! रैनि  = पानी  ! शारदी  = आवाज ,  ध्वानी  तरंग  ! तहाँ  =  वहाँ  ! तत्व = नियम !  परलय  = मृत्यू  , अंत , दुख्ख  ! नाहिं  = नही  है  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  काबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  मै  उस  जगह  आपको  लेकार  जाना  चाहता  हूँ  जहाँ  न  चन्द्र  है  न  सूर्य  और  तारे ,  न  पानी  न  हवा  न  ध्वनी  न  तरंग  न  वहाँ  प्रलय  है  न  नियम  न  जन्ममृत्यू  का  भय  ना  सुख  और  दुख  ना  इच्छा  न  तृष्णा  !  केवल  परम  शांती  , परम आनन्द  ! अभय   !  वो  जगह  है  चेतन  तत्व  राम  का  निजधाम  !  परमात्मा  कबीरस्थान  की  निर्मल  कुटी , मोक्ष , निर्वांण , निज  दौलत  !  और  उसका  मार्ग  है  मेरा  बताया  हुवा  सदधर्म  समताधर्म  सत्यधर्म  सनातन  पुरातन  आद्यधर्म लोकधर्म  आदिवाशीधर्म  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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