पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1 : 10
हिण्डोला : 1 : 10
छौ चारि चौदह सात एकइस , तीनिउ लोक बनाय !
शब्द अर्थ :
छौ = छह विकार ! चारि = चार योनी ! चौदह = भुवन ! सात = खण्ड ! एकइस = नर्क ! तीनिउ लोक ! आकाश , धरती की सतह , धरती के अन्दर पताल !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों चेतन राम सर्व व्यापी सब का निर्माता चालक मालक है चाहे वो धर्ती ही आकाश हो या धरती के अन्दर ! इसने जीव जन्तु सब की निर्मिती की है जो चार प्रकार से है ! पृथ्वी पर पानी और विभाजन कर दिया, खण्ड बनाये ! अनेक प्रलोभन और विकार बानये और अनेक प्रकार के दंड भी बानये एसी वेवस्था में मानव जीवन बनाया ज़िसमे प्रग्या बोध हो सकता है , गीरे तो फिर भाव चक्र , जन्म मृत्यू का फेरा ,चौरसी लाख योनिया का जीवन प्रवास और अनेक प्रयास के बाद फिर अद्भूत मानव जन्म मिलता है यह भी बर्बाद हुवा तो सब बेकर इसलिये अधर्म से बचो यही रास्ता है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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