पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1 : 6
हिण्डोला : 1 : 6
झुलत गण गन्धर्व मुनिवर , झुलत सुरपति इन्द्र !
शब्द अर्थ :
झुलत = माया मोह भरे भवचक्र के संसार में हिण्डोला यानी झुला झुलना ! गण = हिन्दुस्तान के गण राज्य के नागरिक ! गन्धर्व = ग्रीक , अफगानी लोग ! मुनिवर = हिन्दूधर्म के ग्यानी लोग ! सुरपति = राजे लोग ! इन्द्र = विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी राजा !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों ये संसार झुला है , हिण्डोला है ! भवचक्र है और इसमे फसकर लोग चाहे वो नाग लोक हो , ग्रीक , अफगानी हो , धर्मग्यानी हो या विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के राजा इन्द्र हो या उनके अन्य देवता , ब्राह्मण सभी भवचक्र के इस हिण्डोला मे जन्म मृत्यू के फेरे में फस गये है ! इसके दुख भरे मार से वही बच पाये है जो मुलभारतिय हिन्दूधर्म के शिल सदाचार के धर्म मार्ग पर चले है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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