Thursday, 5 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 6

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : हिण्डोला :  1 : 6

हिण्डोला : 1 : 6

झुलत  गण  गन्धर्व  मुनिवर , झुलत  सुरपति  इन्द्र  ! 

शब्द  अर्थ  : 

झुलत = माया  मोह  भरे  भवचक्र  के  संसार  में   हिण्डोला यानी  झुला  झुलना  !  गण  = हिन्दुस्तान  के  गण  राज्य  के  नागरिक  ! गन्धर्व = ग्रीक  , अफगानी  लोग  ! मुनिवर = हिन्दूधर्म  के  ग्यानी  लोग  ! सुरपति  = राजे  लोग  ! इन्द्र  = विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्मी राजा  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  ये  संसार  झुला  है ,  हिण्डोला  है  ! भवचक्र  है  और  इसमे  फसकर  लोग  चाहे  वो  नाग  लोक  हो ,  ग्रीक , अफगानी  हो , धर्मग्यानी  हो  या  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  के  राजा  इन्द्र  हो  या  उनके  अन्य  देवता , ब्राह्मण  सभी  भवचक्र  के  इस  हिण्डोला  मे  जन्म  मृत्यू  के  फेरे  में  फस  गये  है !   इसके  दुख  भरे  मार   से  वही  बच  पाये  है  जो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  शिल  सदाचार  के  धर्म  मार्ग  पर  चले  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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