Monday, 2 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 3

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : हिण्डोला  : 1 : 3

हिण्डोला  : 1 : 3

लोभ  भँवरा  विषय  मरुवा , काम  कीला  ठानि  ! 

शब्द  अर्थ  : 

लोभ  = लालच  !  भँवर  = भ्रमर  ! विषय  = इच्छा  !  मरुवा  = मर्त्य  ! काम  = वासना  ! कीला  = किल  ! ठानि  = समजो  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  लालच  यह  एसी  वस्तु  है  जैसे  कोई  भ्रमर  हो  जो  किसी  वस्तु  पर  मंडराने  लगे  तो  बिना  उसपर  बैठे  वहा  से  हटता  नही  और  उसी  पर  मंडराते   रहता  है  !  काम  वासना  एसी  है  जैसे  किल  जो  चुभन  देती  है  ,  दर्द  देती  है  पर  तब  भी  वह  उसे  चाहती  है  !  यही  लोभ  इच्छा  तृष्णा  माया  वासना  कामना  लालच  ज़िसका  स्वरूप  भँवरे  जैसा  है  काल  के  किल  जैसा  है  अंतता  बार  बार  भवचक्र  मे  जन्म  मृत्यू  के  फेरे  में  ड़ाल  कर  दुख  देती  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

No comments:

Post a Comment