पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला : 2 : 2
हिण्डोला : 2 : 2
जाहि न इच्छा झुलबे की , एसी बुधि केहि पास !
शब्द अर्थ :
जाहि न = जहा नही ! इच्छा = चाहत , मोह ! झुलबे की = संसार की , हिण्डोला मे झुलने की ! एसी बुधि = एसी मति , समझ , ग्यान ! केहि पास = किसके पास है !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों संसार में इच्छा तृष्णा वासना कामना लालच माया मोह रहित कोई नही है ! इसी कारण यहाँ जन्म मृत्यू के फेरे में हर कोई फसा है ! इच्छा नही , तृष्णा नही एसी मति , ग्यान , प्रग्याबोध रखने वाले लोग बहुत कम है क्यू की सत्यधर्म का पालन करने वाले लोग कम है इस लिये झुला झुलने वालोंकी भीड ही अधिक है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ ,
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