Saturday, 7 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 8

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  हिण्डोला 1 :  8

हिण्डोला  : 1 : 8

झुलत  बिरंची  महेश  शुक  मुनि , झुलता  सुरज  चन्द्र  ! 

शब्द  अर्थ  : 

झुलत = हिण्डोला  झुलना  ! बिरंची  = वैरागी  ! महेश  = शंकर  , शिव  ! शुक  मुनि  = तपस्वी  !  सुरज  चन्द्र  = चांद  सूर्य  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  संसार मे  केवल  सामान्य  मानव  इच्छा  तृष्णा  ग्रस्त  है  एसा  नही  है  जो  बडे  बडे  नामचिन  लोग  जैसा  बिरंची  शिव  , मुनि  और  तपस्वी  भी  यही  भवचक्र  का  झुला  झुल  रहे  है  !  यही  नही  चन्द्र  और  सूर्य  भी  इच्छा  ग्रस्त  है ,  वरणा  उनको  एसे  घुमते  रहने  की  क्या  जरूरत  है  ?   बचा  वही  जो  परमात्मा कबीर  है  और  कबीरवाणी  का  धर्म  आचरण  करता  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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