पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला 1 : 8
हिण्डोला : 1 : 8
झुलत बिरंची महेश शुक मुनि , झुलता सुरज चन्द्र !
शब्द अर्थ :
झुलत = हिण्डोला झुलना ! बिरंची = वैरागी ! महेश = शंकर , शिव ! शुक मुनि = तपस्वी ! सुरज चन्द्र = चांद सूर्य !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों संसार मे केवल सामान्य मानव इच्छा तृष्णा ग्रस्त है एसा नही है जो बडे बडे नामचिन लोग जैसा बिरंची शिव , मुनि और तपस्वी भी यही भवचक्र का झुला झुल रहे है ! यही नही चन्द्र और सूर्य भी इच्छा ग्रस्त है , वरणा उनको एसे घुमते रहने की क्या जरूरत है ? बचा वही जो परमात्मा कबीर है और कबीरवाणी का धर्म आचरण करता है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
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