पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला : 2 : 1
हिण्डोला : 2 : 1
बहु विधी चित्र बनाय के , हरि रचिन क्रीडा रास !
शब्द अर्थ :
बहु बिधि = अनेक प्रकार के ! चित्र बनाय = वस्तु , जीव जन्तु ! हरि = चेतन तत्व राम ! क्रीडा रास = खेल !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों संसार एक प्रकार का खेल का मैदान है ज़िसमे चेतन राम हरि यानी इच्छा रहित बनकर खेल कर रहे है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
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