Thursday, 19 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 2 : 1

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  हिण्डोला  :  2 : 1

हिण्डोला :  2 : 1

बहु  विधी  चित्र  बनाय  के ,  हरि  रचिन  क्रीडा   रास  !

शब्द  अर्थ  : 

बहु  बिधि  = अनेक  प्रकार  के !  चित्र  बनाय =   वस्तु , जीव  जन्तु   ! हरि  = चेतन  तत्व  राम  ! क्रीडा  रास   = खेल  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों  संसार एक प्रकार  का  खेल  का  मैदान  है  ज़िसमे  चेतन  राम  हरि  यानी  इच्छा रहित  बनकर  खेल  कर  रहे  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याn , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

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