Sunday, 15 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 16

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  हिण्डोला : 1 : 16 

हिण्डोला  : 1 : 16

तहाँ  से  बिछुरे  बहु  कल्प  बीते , भूमि  परे  भूलाय  ! 

शब्द  अर्थ  : 

तहाँ से  = चेतन  तत्व  राम  प्रग्या  बोध  से ! बिछुरे = अलग  हुवे  ! बहु  कल्प  बीते  = बहुत  समय  हुवा  है  ! भुमि  परे  भूलाय  = पृथ्वी पर  जन्म  लेते  है  भूल  गये  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते. है  भाईयों  आप  वस्तुता  वो  चेतन  तत्व  राम  मालिक  है  जो  निराकार  निर्गुण  अजर  अमर सर्वव्यापी  सार्वभौंम  परमात्मा  हो !  पर  आप  पृथ्वी  पर  जीव  जन्तु  प्राणी  पक्षी  आदी  जन्म  लेते  ही  खुद  की  जानकारी  भूल  कर  मर्त्य  जीव  बन  कर  कुशल  अकुशल  कर्म  करते  हो !  और  उसके  परिणाम  स्वरूप  बार  बार  जन्म  लेते  हो  मरते  हो  ! तुम्हे  तुम  क्या  हो  याद  नही  पर  मै  याद  दिलाना  चाहता   हूँ  क्यू  की  तुम  दुख्ख  भरे  भवचक्र  जन्म  मृत्यू  के  फेरे  से  धर्म  पालन  कर  बच  सको  ! 

धर्म  पालन  करो  अधर्म  को  छोडो  तो  तुम्हे  तुम्हारे  वास्तविक  स्वरूप  का पता  चले   , कुछ  याद  आये  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म  विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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