Tuesday, 10 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 11

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  हिण्डोला : 1 :  11

हिण्डोला  : 1 : 11

खानी  बानी  खोजि  देखहु , अस्थिर  कोई  न  रहाय  ! 

शब्द  अर्थ  : 

खानि  बानी  = शरीर  शब्द , संसार ! खोजि  = ढूंडा  ! देखहु   = देखा  , समज  में  आया  ! अस्थिर  =  अचल  ! कोई  न  रहाय  ! कोई  नही  है  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है. भाईयों  मैने  सारे  संसार  मे  एक  बात  गौर  करने  वाली  देखि  है !  यहाँ  कोई  अचल  नही  है  , स्थिर  नही  है  !   हर  कोई  चलित  है !   परिवर्तनशिल  है  !  चाहे  जन्म  का  शरीर  हो  या  वस्तु  और  परिणाम  हो  !  हर  कोई  एक  दुसरे  को  प्रभावित  कर  रहा  है  और प्रभावित  हो  रहा  है !  अमर  अजर  अपरिवर्तनिय  कोई  नही !  जो  शरीरधारी  है  सब  मृत्यू  की  और  बढ़ते  है  !  जन्म  मृत्यू  का  चक्र  निरंतर  घुमता  रहता  है  ज़िसे  कर्म  गती  देता  है  वो  कारण  इच्छा  है  !  और  फल  धर्म  अधर्म  है  !  जो  फिर  गती  सदगती  दूर्गती  निछित  करती  है  ! इस  लिये  शिल  सदाचार  भाईचारा  समता  ममता  विश्वबंधुत्व  का  मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  का  पालन  करो और  दुखो  से  बचो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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