पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1 : 11
हिण्डोला : 1 : 11
खानी बानी खोजि देखहु , अस्थिर कोई न रहाय !
शब्द अर्थ :
खानि बानी = शरीर शब्द , संसार ! खोजि = ढूंडा ! देखहु = देखा , समज में आया ! अस्थिर = अचल ! कोई न रहाय ! कोई नही है !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है. भाईयों मैने सारे संसार मे एक बात गौर करने वाली देखि है ! यहाँ कोई अचल नही है , स्थिर नही है ! हर कोई चलित है ! परिवर्तनशिल है ! चाहे जन्म का शरीर हो या वस्तु और परिणाम हो ! हर कोई एक दुसरे को प्रभावित कर रहा है और प्रभावित हो रहा है ! अमर अजर अपरिवर्तनिय कोई नही ! जो शरीरधारी है सब मृत्यू की और बढ़ते है ! जन्म मृत्यू का चक्र निरंतर घुमता रहता है ज़िसे कर्म गती देता है वो कारण इच्छा है ! और फल धर्म अधर्म है ! जो फिर गती सदगती दूर्गती निछित करती है ! इस लिये शिल सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व का मुलभारतिय हिन्दुधर्म का पालन करो और दुखो से बचो !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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