Monday, 16 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 17

पवित्र  बीजक :  प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1 : 17

हिण्डोला  : 1 : 17

साधु  संगति  खोजि   देखहु , बहुरि न  उलटि  समाय  !

शब्द  अर्थ  : 

साधु  संगति  = साधु  की  बैठक  , संगत  ! खोजि  देखहु  = जा  कर  देखा  ! बहुरि न  उलटि  समाय  = फिर  जाने  की  इच्छा  नही  हुवी  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  मैने  बहुत  सारे  साधु  की  मंडली  देखि !   वहा  जाकर  उनकी  बात  सुनी !   रहन. सहन   देखा  खानपान  , आचार   विचार  देखे !   पर  मुझे  कोई  शिल  सदाचार  भाईचारा समता नही  दिखी  ! जाती  वर्ण  ऊचनीच  भेदभाव  अस्पृष्यता  देखि !  हत्या  झूठ  देखा   गांजा  मदिरा  का  सेवन  देखा !  नशा  व्यभिचार  देखा !  कोई  त्याग  , सत्य  संयम  नही  दिखा  !  एसी  साधु  संगती  मे  मै  फिर  कभी  नही  गया  जहा  धर्म  नही ! 

साधु  की  मंडली , संगती  धर्म  के  लिये  होना  चाहिये  नाकी  दिखावे  के  लिये  ! एसे  साधु  से  तो संसारी  भला  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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