Wednesday, 18 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 19

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध  : हिण्डोला  :  1 : 19

हिण्डोला  : 1 : 19

कहहिं  कबीर  सत  सुकृत  मिलै  , तो  बहुरि  न  झुले  आन  ! 

शब्द  अर्थ  : 

कहहिं कबीर = कबीर  कहते  है  ! सत  सुकृत  = सन्त क्रियावान  ! मिलै  = मिले  ! तो  बहुरि  = तो  फिर  ! न  झुले  आन = फिर  इस  हिण्डोला   मे  न  फसे  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  संसार  रूपी  इस  हिण्डोला  का  आनन्द  बिना  फसे  कैसे  उठाये  यह  जानकार  क्रियाशिल   संत  ही  दे  सकता  है  बातुनी  संत  नही  !  ऐसा  संत  विरला  होता  है  ज़िसने  इस  झुले  को  झुला  भी  और  बेदाग  बाहर  आया  !  ये  विरक्ती  की  शिक्षा  बडी  अद्भूत  शिक्षा  है  जो  कोई  ग्यानी  ही  दे  सकता  है  ज़िस  ने  चेतन  राम  तत्व  के  स्वरूप  को  खुद  पहचान  लिया  हो  !  सुनी  सुनायी  बात  पर  भरोसा  न करो  !  एसे  रस्ते  चलो  जीसका  जानकार  गुरू  खुद  उस  रास्ते  चल  कर  निर्वांण  की  अवस्था   हासिल  की  हो  !  विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी  पंडित  जो  स्वर्ग  नर्क  होम  हवन  आदी  का  जो  मार्ग  बताते   है  झूठ  है  ! वे  झूठे  गुरू  है  कोई  साधु  सन्त  नही  ! वो  मार्ग  और  धर्म  ही  गलत  है  जो  समता  शिल  सदाचार  के  रास्ते  पर  न  चले  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

No comments:

Post a Comment