Sunday, 8 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 9

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  हिण्डोला 1 : 9

हिण्डोला  : 1 : 9 

आप  निर्गुण  सगुण  होय , झुलिया  गोबिन्द  ! 

शब्द  अर्थ  : 

आप  = खुद  ! निर्गुण  सगुण  = गुणी  निर्गुणी  ! होय  = विचार  ! झुलिया  = झुलना  ! गोबिन्द  = कृष्ण  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  गोविन्द  अर्थात  कृष्ण  ने  अपने  उपदेश  गीता  में  खुद  को  ईश्वर  बताया  और  सगुण  होकर वो  खुद  मानव  जन्म  ज़िये  ! जो  निराकार  निर्गुण  स्वरूप  को  उसने  अर्जून  को  दिव्य  दृष्टी  दे  कर  उससे  अवगत  कराया  !  यह  दिव्य  दृष्टी  ही  प्रग्या  बोध  है  ! अतंता  निर्गुण  निराकार  सर्वव्यापी   सर्वग्य  , सार्वभौम  चेतन  राम  ही  एकमात्र  मालक चालक  परमात्मा  है  ज़िसके  स्वरूप  को  खुद  परमात्मा  कबीर  प्राप्त  हुवे  ! अपनी  पवित्र  वाणी  बीजक  मे  यही  दिव्य  दृष्टी  कबीर  साहेब  हमे  देते  हुवे  बताते  है  इस  दिव्य  दृष्टी  को  वही  प्राप्त  कर  सकता  है  जो  शिल  सदाचार  भाईचारा  समता ममता  विश्वबंधुत्व  का  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  का  पुरा  और  विशुद्ध  रूप  से  पालन  करता  हो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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