Thursday, 12 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 13

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  हिण्डोला : 1 : 13

हिण्डोला  : 1 : 13

साधु  संगति  खोजि  देखहु , जीव  निस्तरि  कित  जाहिं  ! 

शब्द  अर्थ  : 

साधु  संगति  = साधु  मंड़ली  , प्रवचन , संगत  ! खोजि  देखहु  = खोज  कर  देखा  !  जीव  निस्तरि  = जीव  की  मदत  ! कित  जाहिं  = कितने  जाते  है  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों मैने  बहुत  सारे  साधु  संतोंके  आश्रम  , टोलिया  देखि   है  ! खुद  को  साधु कहने  वाले  ये  लोग  समाज  मे  लोगोंके  कोई  काम  के  नही  ! कितने  ही  साधु  केश  बढाकर  , भस्म  फास  कर  गांजा  चिलिम   फुकते  रहते  है  पर  जीव  की  पीडा  नही  समजते  है  ! साधु  का  भेष  बनाया पर  अन्य  जीव  मानव  के  काम  नही  आया  तो  एसे  साधु  होना  निरर्थक   है  , जीवन  व्यर्थ  है  ! साधु  संगत  का  मतलब  समाज  सेवा  होना  चाहिये  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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