पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : हिण्डोला : 1 : 13
हिण्डोला : 1 : 13
साधु संगति खोजि देखहु , जीव निस्तरि कित जाहिं !
शब्द अर्थ :
साधु संगति = साधु मंड़ली , प्रवचन , संगत ! खोजि देखहु = खोज कर देखा ! जीव निस्तरि = जीव की मदत ! कित जाहिं = कितने जाते है !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों मैने बहुत सारे साधु संतोंके आश्रम , टोलिया देखि है ! खुद को साधु कहने वाले ये लोग समाज मे लोगोंके कोई काम के नही ! कितने ही साधु केश बढाकर , भस्म फास कर गांजा चिलिम फुकते रहते है पर जीव की पीडा नही समजते है ! साधु का भेष बनाया पर अन्य जीव मानव के काम नही आया तो एसे साधु होना निरर्थक है , जीवन व्यर्थ है ! साधु संगत का मतलब समाज सेवा होना चाहिये !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
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