हिण्डोला : 1 : 7
झुलत नारद शारदा , झुलत व्यास फणिन्द्र !
शब्द अर्थ :
झुलत = हिण्डोला झुलना ! नारद = वैदिक नारद मुनी ! शारदा = वैदिक विद्दया देवी ! व्यास = वेद , महाभारत का लेखक ! फणिद्र = वैदिक विष्णु !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर हिण्डोला के इस पद में कहते है भाईयों आप ज़िन विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के देवी देवता रूषी मुनी को महान मानते हो जैसे मुनी नारद , विद्दया की देवी शारदा , रूषी व्यास और शेषनाग पर लेटा विष्णु भगवान सब इस संसार के फस कर रह गये ! जन्म लिया और मर गये पर निर्वाण नही प्राप्त कर सके वे आज भी भवचक्र में फसे हुवे है ! इन में से वैदिक ब्राह्मनोने बहुत सारे पात्र मुलभारतिय हिन्दूधर्म के एक समतावादी पंथ बौद्ध मत से चुराये हुवे है क्यू की वैदिक ब्राह्मणधर्म के सभी ग्रांथो की रचना 7 से 10 शती के बिच मौर्य और बौद्ध पात्रोंकी चौरी कर बनाई गयी !
जो भी विषमातावादी , वर्णजाती वादी , ऊचनीच अस्पृष्यता छुवाछुत भेदभाव , शोषण वादी , मनुवादी विचार के धर्म है वह वस्ताव मे अधर्म और विकृती है उससे भला कोई कैसे चेतन राम के दर्शंन कर सकता है ? एसे पापी लोग संसार में भटक रहे है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
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