Tuesday, 17 February 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Hindola : 1 : 18

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  हिण्डोला  : 1 : 18

हिण्डोला  : 1 : 18 

ये  झुलबे  को  भय  नहिं  , जो  होय  सन्त  सुजान  : 18

शब्द  अर्थ  : 

ये  झुलबे  = इस  संसार  रूपी  हिंडोले  ! को  = इसका  ! भय  नहिं  = भय  , डर  नही  लगाता  है  ! जो  होय  = जो  है  ! सन्त  सुजान  =  जानकार , ग्यानी  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  हिण्डोला  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  इस  संसार  का  भय  या  डर  उन  ग्यानी , जानकार ,  प्रग्याबोधी  साधु  संत  गुरूजानो  को  नही  लगता  है  जीनको  इस  संसार  रूपी  झुले  के  स्वरूप  , कार्यपद्धती  , तंत्र  और  चालने  वाले  की  मनशा जानता  हो  !  भाई  ये संसार  रूपी  झुला  परमात्मा  ने  आपको  परेशान  करने   के  लिये  नही  बनाया  है  बल्की  इसे  आपके  खुशी  , मनोरंजन  के  लिये  बनाया  है !   तब  तक  इस  में  बेडर  खुशी और  आनन्द  ले  कर  झुलो  जब  तक  तुम  कुछ  उल्टेसिधे  काम  नही  करते  , उसके  तंत्र  नियम के  साथ  छेडछाड   नही  करते  ,  बगावत  नही  करते  ! धर्म  नियम  न  मानोगे  , झुले  के  मालिक  का  कहना  इच्छा  आदेश  संकेत  नही  मानोगे  तो  झुले  के  भवचक्र  , परिणाम  , जन्म  मृत्य  के  फेरे   फस  जावोगे  !  अच्छे  कर्म  करो  तो  अच्छा  फल यही  उस  मालिक  चेतन  तत्व  राम  का  संकेत  है  जो  लगातार  आपको  वह  देता  रहता  है  !  उसे सुनो  अंतरआत्मा  राम  की  आवाज  सुनो  वो  तुम्हे  खुशी  देना  चाहता  है  दुख  नही !  दुख  का  चयान तो  तुम  लालच  माया  मोह  अहंकार  आदी  के  कारण  अग्यानी  बन  कर  करते  हो  !  जो  साधु  सज्जन  इसे  जानता  वही  सुजान  संत  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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