पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 16
बेलि : 2 : 16
मन बुद्धि ढिग फैलायउ , हो रमैया राम
शब्द अर्थ :
मन बुद्धि = मन गढंत ! ढिग = बहुत ! फैलायउ = प्रचार प्रसार किया ! हो रमैया राम = हे राम को मानने वाले सज्जन जनो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म ने बुद्धि को भ्रमित करने वाले मनगढंत ग्रंथो का ढेर लगा दिया है और इनमे वर्ण जाती भेदभाव अस्पृष्यता शोषण गुलामी पुंजीवाद वसाहतवाद अंधश्रद्धा अधर्म जनेऊ सोवला होमहवन बली दारू देवदासी स्त्रीशोषण सतीप्रथा बलात्कारी ब्रह्मा विष्णु भगवान के अवतार आदी सभी अधर्म विकृती का समर्थन करने वाले ग्रंथो का पहाड खडा किया ताकी लोग एक से छूटे तो दुसरे मे फसे ! कबीर साहेब कहते है भाईयों ये तुम्हारा धर्म नही ! ये मक्कार लोगोंका धर्म है जो विदेशी है ! यूरेशिया से आये है और अधर्म विकृती अपने साथ लाये है ! मुलभारतिय हिन्दुधर्म आप का अपना सनातन पुरातन आद्यधर्म लोकधर्म आदिवाशी सत्यधर्म शिल सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व एकेश्वर निराकार निर्गुण चेतन तत्व राम को मानने वाला मुलभारतिय हिन्दूधर्म है ! विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म और मुलभारतिय हिन्दुधर्म अलग अलग है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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