Monday, 19 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 2

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली  : 1 : 2

बिरहुली  : 1 : 2

निशि  - बासर  नहिं  होते  बिरहुली 
पौन  पानि  नहिं  मूल  बिरहुली  !

शब्द  अर्थ  : 

निशि  बासर   = दिन  रात्र  ! पौन  पानि = पवन  पानी  ! मूल  = प्रथम  ! बिरहुली  = जग  , संसार , शृष्टी  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  अगर  चेतन  तत्व  निराकार  निर्गुण परमात्मा  राम  न  होता  तो  न  यह  संसार  होता  न  वायू  हवा  पानी  होता  !  चेतन  तत्व  राम  ही  सब  का  मूलस्तोत्र  है  , वही  से  सब  की  निर्मिती  है  और  वही  अंत  मे  समाना  है  ! उस  परमतत्व  चेतन  राम  का  हमेशा  स्मरण  करो  , नमन  करो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
कल्याण अखण्ड हिन्दुस्तान शिवशृष्टी

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