पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 2
बिरहुली : 1 : 2
निशि - बासर नहिं होते बिरहुली
पौन पानि नहिं मूल बिरहुली !
शब्द अर्थ :
निशि बासर = दिन रात्र ! पौन पानि = पवन पानी ! मूल = प्रथम ! बिरहुली = जग , संसार , शृष्टी !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों अगर चेतन तत्व निराकार निर्गुण परमात्मा राम न होता तो न यह संसार होता न वायू हवा पानी होता ! चेतन तत्व राम ही सब का मूलस्तोत्र है , वही से सब की निर्मिती है और वही अंत मे समाना है ! उस परमतत्व चेतन राम का हमेशा स्मरण करो , नमन करो !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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