पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :बेलि : 2 : 6
बेलि : 2 : 6
गुरू दीहल मोहि थापि , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
गुरू = शिक्षक ! दीहल = दिया ! थापि = थोपा ! हो रमैया राम = सज्जन जनो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के लोगोने मुलभारतिय हिन्दूधर्म पर अपना वेद और भेद का धर्म ग्रंथ और मनुस्मृती कानुन का जाती वर्णवाद ऊचनीच भेदाभेद छुवाछुत अस्पृष्यता विषमता का नियम स्थापित कर खुद को सर्वश्रेष्ठ गुरू ग्यानी पंडित पूजारी घोषित कर सब के उपर जबर्दस्ती थोपा ! खुद को कानुन और धर्मग्रंथ का अर्थ बताने वाला घोषित किया ज़िस पर कोई प्रतीवाद नही कर सकता और कोई करे तो उसे उपर प्रतीबंध , निष्कषण , अस्पृष्यता लाद दी गई ! कुल मिलाकर वैदिक ब्राह्मणधर्म स्थानिय हिन्दू लोगोंपर अन्याय पूर्वक लादा गाया जैसे वो मानव नही जनावर हो ! उनके बुद्धी को कुंठित कर मनोऋग्ण और गुलाम बनाया गया और ये सब ऊंके धर्म मुलभारतिय हिन्दूधर्म के नाम से ही किया गया ताकी झूठ का उनको पता न चले ! इसे हिन्दू मान्यता परम्परा भगवान की मर्जी आदी नाम पर लादा गया ! कबीर साहेब ने इसे मानने से इंकार कर फिर से समता शिल सदाचार भाईचारा का मुलभारतिय हिन्दूधर्म पूनरस्थापित किया !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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