बेलि : 2 : 14
कालबूत सब आहिं , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
कालबूत = मृत्यू , भूत काल ! सब आहिं = सब को आता है ! हो रमैया राम = हे सज्जन मनुष्य जनो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों मृत्यू सब को आता है इस महान सत्य को जानो और अपना जीवन एसे धर्माचरण से बितावो ज़िसमे कभी पछतावा न हो ! आपका अपना सनातन पुरातन आद्यधर्म लोकधर्म आदिवाशी मुलभारतिय हिन्दूधर्म शिल सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व एकेश्वर निराकार निर्गुण सत्य अहिंसा मानवता का धर्म है ज़िसके आचरण से सब का भला होता है ! सब का कल्याण होता है ! वही दुसरी तरफ यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म में वर्ण जाती भेदभाव अस्पृष्यता शोषण गुलामी पुंजीवाद वसाहतवाद अंधश्रद्धा अधर्म विकृती जनेऊ सोवला होमहवन बली दारू सोंमरस देवदासी स्त्री शोषण गुलामी मनुवाद ब्राह्मणवाद , लंपटवृती , बलात्कारी ब्रह्मा इन्द्र सोम आदी को देव बताया गया है ! ऐसे विकृत धर्म को मानने से किसी का क्या भला होगा ? भाईयों मुलभारतिय हिन्दूधर्म और विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अलग अलग है ! दोनो के फल भी अलग अलग है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
No comments:
Post a Comment