पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 12
बिरहुली : 1 : 12
जन्म जन्म यम अन्तरे बिरहुली
फल एक कनयर डार बिरहुली !
शब्द अर्थ :
जन्म जन्म = हर जन्म ! यम अन्तरे = मृत्यू अन्दर ही है ! फल एक = एक ही फल ! कनयर डार = कर्म फल की शाखा है ! बिरहुली जग , संसार , माया मोह !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों जन्म के साथ ही मृत्यू का उदय होता है ! जहा जन्म वहा मृत्यू निच्छित है ! पर जीवन जो जन्म मृत्यू के बिच का अन्तर है वह कर्म से बंधा हुवा है ! जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलना निच्छित है ! जैसे जन्म और मृत्यू ! यहाँ तक की कर्म का फल कभी तुरंत कभी कुछ समय बाद तो कहि मृत्यू के बाद भी मिलता है तो कहि आगे का जन्म कैसे कहा और क्यू हो ! इस पुरे वेवस्था को भवचक्र कहा जाता है जो इस शृष्टी , विश्व , जग का नियम है ! इस लिये कर्म एसा कीजिये की उसका फल इस जन्म में या अन्य जन्म में सुखद मिले और यह सुखद उत्तम जन्म फल शिल सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व अहिंसा परोपकार के धर्म मुलभारतिय हिन्दूधर्म के सिवाय अन्य कोई नही !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
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