Monday, 12 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 11

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  बेलि  : 2 : 11

बेलि  : 2 : 11

यह  मुनि  के  धीरज  धरहु , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

यह  मुनि  =  इनके  मुनि  ! धीरज  धरहु  = शांत  रहे  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस पद  में  कहते  है  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  के  मुनि  शिग्रह  कोपी  है  ! छोटी  छोटी  बात  पर  क्रोधित  हो  कर  शाप  देना  गाली  देना  दंड  देना  इनकी  आदत  है !  क्या ये  धर्म  है  ?  क्या  ये  उचित  ह ?   इनका  इनके  मन  पर  लालच  माया मोह इच्छा  तृष्णा  वासना कामना पर  कोई  अंकुश  नही  !  क्या  ये  मुनी  कहलाने  के  लायक  है  ?  एसे  मुनी  जो  जाती  वर्ण  ऊचनीच  भेदभाव  अस्पृष्यता  छुवाछुत शोषण  गुलामी  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा अधर्म  विकृती का  समर्थन  करते  क्या  वे  मुनि  महाराजा  महंत  कहलाने  के  लायक  है  ? कभी  नही  मनु  कभी  मुनि  नही  हो  सकता  !  लंपट  ब्रह्मा  कभी  भगवान  नही  हो  सकता ,  इनका  मन  बेकाबू  है  और  मानव अहित  मे  काम  करता है !   ये  त्याज्य  है,  इनका  धर्म  अधर्म  है, विकृत  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

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