पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 11
बेलि : 2 : 11
यह मुनि के धीरज धरहु , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
यह मुनि = इनके मुनि ! धीरज धरहु = शांत रहे !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के मुनि शिग्रह कोपी है ! छोटी छोटी बात पर क्रोधित हो कर शाप देना गाली देना दंड देना इनकी आदत है ! क्या ये धर्म है ? क्या ये उचित ह ? इनका इनके मन पर लालच माया मोह इच्छा तृष्णा वासना कामना पर कोई अंकुश नही ! क्या ये मुनी कहलाने के लायक है ? एसे मुनी जो जाती वर्ण ऊचनीच भेदभाव अस्पृष्यता छुवाछुत शोषण गुलामी पुंजीवाद वसाहतवाद अंधश्रद्धा अधर्म विकृती का समर्थन करते क्या वे मुनि महाराजा महंत कहलाने के लायक है ? कभी नही मनु कभी मुनि नही हो सकता ! लंपट ब्रह्मा कभी भगवान नही हो सकता , इनका मन बेकाबू है और मानव अहित मे काम करता है ! ये त्याज्य है, इनका धर्म अधर्म है, विकृत है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
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