Saturday, 24 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 7

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली  : 1 : 7

बिरहुली  : 1 : 7 

फूल  एक  भल  फुलल  बिरहुली  
फूलि  रहल  संसार  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

फूल  = दृष्य ,  फुल , फल  ! भल  फुलल  = सुन्दर  दृष्य  !  फूलि  रहल  संसार  = ये  संसार  वृक्ष  ! बिरहुली  = मोह  माया  युक्त  संसार  , जग  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यह  संसार  एक  वृक्ष  के  जैसा  है  जीस  पर  सुन्दर  फुल  दिखाई  देते  है  !  ये  फुल  बडे  आकर्षक  है  , ललचाने  वाले  है,  मोहित  करने  वाले  है,  पर  तृष्णा  भरे  है !   कभी  समाप्त  नही  होते !   उल्टे  एक  लो  तो  दो  नये  निकल  आते  है !   जैसे  इच्छा  के  फुल  कभी  नही  मरते  ! इस  लिये  संयम  और  धर्म  , श्रद्धा  और  सबुरी  से  काम  लो  !  फुल  से  केवल  मोहित  ना  हो  गुण  दूर्गुण  जानो !  कबीर  साहेब  यही  परख  का  ग्यान  देते  है  ,  ताकी  विशैले  फल  के  दूष  परिणाम  से  बचो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

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