पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 7
बिरहुली : 1 : 7
फूल एक भल फुलल बिरहुली
फूलि रहल संसार बिरहुली !
शब्द अर्थ :
फूल = दृष्य , फुल , फल ! भल फुलल = सुन्दर दृष्य ! फूलि रहल संसार = ये संसार वृक्ष ! बिरहुली = मोह माया युक्त संसार , जग !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों यह संसार एक वृक्ष के जैसा है जीस पर सुन्दर फुल दिखाई देते है ! ये फुल बडे आकर्षक है , ललचाने वाले है, मोहित करने वाले है, पर तृष्णा भरे है ! कभी समाप्त नही होते ! उल्टे एक लो तो दो नये निकल आते है ! जैसे इच्छा के फुल कभी नही मरते ! इस लिये संयम और धर्म , श्रद्धा और सबुरी से काम लो ! फुल से केवल मोहित ना हो गुण दूर्गुण जानो ! कबीर साहेब यही परख का ग्यान देते है , ताकी विशैले फल के दूष परिणाम से बचो !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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