Friday, 30 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 13

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बिरहुली  : 1 : 13

बिरहुली  : 1 : 13

कहहिं  कबीर  सच  पाव  बिरहुली 
जो  फल  चाखहु   मोर  बिरहुली  ! 

शब्द  अर्थ  : 

कहहिं कबीर = कबीर  कहते  है  ! सच  पाव  = सत्यधर्म  मिला  ! जो  फल  = वो  फल  ! चाखहु  = चखा  रहा  हूँ  ! मोर  बिरहुली  = यही  मेरा  संसार  है  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बिरहुली  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  मैने  निराकार  निर्गुण  चेतन  तत्व  सार्वभौम सदा  के  लिये  अजर  अमर  सर्वव्यापी  कण  कण  में  बसा  राम  का  सत्यधर्म  प्रग्या   बोध  द्वारा  पाया  है !  इस   विशुद्ध  ग्यान  से  मै  सदा  आनन्दित  और शुखी  हूँ  !  और  इसके  प्राप्ती  का  मार्ग  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  जो  शिल  सदाचार भाईचारा समता  ममता  विश्वबंधुत्व  एकेश्वर  सत्यराम  की  प्राप्ती  का  मार्ग  आप  सब  को  बता  रहा  हूँ  ताकी आप  सब  का  भला  हो  कल्याण  हो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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