पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 2 : 5
बेलि : 2 : 5
ई तो है वेद शास्त्र , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
ई = इनके ! तो है = कहते है ! वेद शास्त्र = वेद और मनुस्मृती इत्यादी !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों ये विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी लोग बडे अहंकार के साथ बताते है की इनके यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म का धर्म ग्रंथ वेद , शृती और मनु स्मृती आदी स्मृतिया है ! वेद मे है भेद वर्णवाद ऊचनीच ! लंपट ब्रह्मा को देव और वेद का जनक बताते है ! इस लंपट ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण , भुजा से क्षत्रिय , पेट से वैश्य और पाव से शुद्र का जन्म हुवा ऐसा ये बताते है ! इसने होम हवन जनेऊ संस्कार गाय बैल घोडे आदी की होम अग्नी में बली देनेसे विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के देव साक्षात सशारीर होम अग्नी से प्रगट होते है एसा ये बताते है ! ये ब्राह्मण देवाता मांसाहारी है उनहे सोमरस दारू बहुत प्रिय है ये नाच गाना रंभा ऊर्वशी आदी का नाच गाना देखते रहते है और इन वेश्याये को मुलभारतिय राजा संत आदी को रिझाने भेजते रहते है , ये लंपट तथास्तु बोलकर इच्छित वर भी देते है ! मनुस्मृती ने जातीवाद विषमाता ऊचनीच अस्पृष्यता छुवाछुत शोषण गुलामी स्त्री का तिरस्कार और शोषण ,सतीप्रथा , बाल विवाह लैंगिक संबंध और शोषण आदी को विदेशी यूरेशियन वैदिक धर्म का कानुन बता ये एक वर्ण विदेशी ब्राह्मण अन्य सभी गैरब्राह्मण अपनेसे निचे , तुच्छ , गुलाम बताते है !
इन विदेशी यूरेशियान वैदिक ब्राहमिनो ने मुलभारतिय हिन्दूधर्म समाज का पुरा बेडा गर्क कर दिया ! विषमाता शोषण को ही ये धर्म संस्कृती बताते है ज़िसे परमात्मा कबीर सिरे से खारीज कर विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म और मुलभारतिय हिन्दूधर्म को अलग अलग बताते है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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