Tuesday, 13 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 2 : 12

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध :  बेलि  : 2 : 12

बेलि  : 2 : 12

मन  बढ़ि  रहल  लजाय , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

मन  = इच्छा  , तृष्णा , वासना  ! बढ़ि  =  जादा  ! रहल  लजाय  = लज्जित  करती  है  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  की  शिक्षा  मन  पर  अंकुश  नही  है  वह  लालच  , झूठ  , मक्कारी , पाप  चौरी  बलात्कार  आदी  दूर्गुण  को  बढावा  देने  वाला  धर्म  है  विषमता  शोषण  जातीवाद  वर्णवाद  मनुवाद  पुंजीवाद  वसाहतवाद अंधश्रद्धा  जनेऊ  सोवला  होमहवन  बली  दारू देवदासी  प्रथा आदी  सभी  बुराईया  को  बढावा  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  देता  है  , मन  को  सुसंकृत  करने  के  बाजय  विकृत  करता  है  अधमी  बनाता  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

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