बिरहुली : 1 : 5
नित गौड़ैं नित सीचैं बिरहुली
नित नव पल्लव डार बिरहुली !
शब्द अर्थ :
नित गोड़ैं = हमेशा गाड़े ! नित सीचैं = नित पानी देना , देखभाल करना ! नित नव पल्लव = नई पालवी , अंकुर आना ! पल्लव डार = शाखा डालिया ! बिरहुली = संसार , जग !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों संसार का निर्माता , चालक , मालक केवल एक है और वो है निराकार निर्गुण चेतन तत्व राम ! वह सार्वभौम है कण कण में है और वो सब में है और सब उसमे है ! सारी निर्मिती पोषण क्षय उसी की इच्छा और अंतिम है ! संसार का बीज डाल पत्ते फुल फल और फिर अंत मे बीज उसी की नित नई निर्मिती है ! हमे किसी बात का अहंकार नही करना चाहिये !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,
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