Thursday, 22 January 2026

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Birhuli : 1 : 5

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बिरहुली : 1 : 5

बिरहुली : 1 : 5

नित गौड़ैं नित सीचैं बिरहुली 
नित नव पल्लव डार बिरहुली ! 

शब्द अर्थ : 

नित गोड़ैं = हमेशा गाड़े ! नित सीचैं = नित पानी देना , देखभाल करना ! नित नव पल्लव = नई पालवी , अंकुर आना ! पल्लव डार = शाखा डालिया ! बिरहुली = संसार , जग ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बिरहुली के इस पद में कहते है भाईयों संसार का निर्माता , चालक , मालक केवल एक है और वो है निराकार निर्गुण चेतन तत्व राम ! वह सार्वभौम है कण कण में है और वो सब में है और सब उसमे है ! सारी निर्मिती पोषण क्षय उसी की इच्छा और अंतिम है ! संसार का बीज डाल पत्ते फुल फल और फिर अंत मे बीज उसी की नित नई निर्मिती है ! हमे किसी बात का अहंकार नही करना चाहिये ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

No comments:

Post a Comment