Friday, 26 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 24

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 24

बेलि : 1 : 24

खाखर डारिनि फोरि , हो रमैया राम ! 

शब्द अर्थ :

खाखर = खोपडी ! डारिनि = डंडा , बास , लकडी ! फोरि = फोडना ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों यह मर्त्य शरीर का दुरपयोग और मिथ्या अभीमान ना करो आप सब जानते हो मृत्यू के बाद शरीर की क्या अवस्था होती है ! बदबू आती है , सडने लगता है हड्डीया अकडती है ! 
समशान भुमी मे दफनाया जाता है या प्रेत को अग्नी दी जाती है , शरन पर , चीता पर लकडी के साथ रच दिया जाता है और तेल घी ड़ाल कर जलाया जाता है ! आग की लपेट मे अकड कर शरीर खडा न हो इस लिये डंडे से दबाया जाता है और खोपडी फूट कर जल्दी जले इस लिये उसे बास या लकडी के डंडे से तोडा जाता है ! यह है मानव शरीर का अन्तिम सच ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

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