#शब्द : ८३
भूला बे अहमक नादाना, जिन्ह हरदम रामहिं ना जाना : १
बरबस आनि के गाय पछारी, गरा काटि जिव आपु लिया : २
जीयत जीव मुर्दा करि डारे, ताको कहत हलाल हुआ : ३
जाहि माँसु को पाक कहत हो, ताकी उत्पत्ति सुन भाई : ४
रजो वीर्य से माँस उपानी, सो माँस नापाकी तुम खाई : ५
अपनी देखि कहत नहिं अहमक, कहत हमारे बडन किया : ६
उसकी खून तुम्हारी गर्दन, जिन्ह तुमको उपदेश दिया : ७
स्याही गई सफेदी आई, दिल सफेद अजहूँ न हुआ : ८
रोजा बाँग निमाज क्या कीजै, हुजरे भीतर पैठि मुवा : ९
पण्डित वेद पुराण पढें सब, मुसलमान कुराना : १०
कहहिं कबीर दोउ गये नरक में, जिन्ह हरदम रामहिं ना जाना : ११
#शब्द_अर्थ :
बे = अरे, अबे ! अहमक = मूर्ख ! नादाना = नासमझ ! हरदम = हर पल , हर साँस , हर जिंदा प्राणी ! बरबस = जबरदस्ती ! पछारी = गिराना ! हलाल = जायज ! पाक = पवित्र ! अपानी = पैदा हुआ ! स्याही = काले बाल ! सफेदी = सफेद बाल, बुढ़ापा ! रोजा = रमजान का उपवास ! बाँग = अजान , प्रार्थना ! निमाज़ = नमाज ! हुजरे = एकांत , ध्यान का कमरा ! नरक = पाप ! राम = चेतन तत्व राम !
#प्रज्ञा_बोध :
धर्मात्मा कबीर कहते हैं भाईयो विदेश यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के पाण्डे पुजारी ब्राह्मण और विदेश तुर्की मुस्लिमधर्म के मुल्ला मौलवी दोनो सत्य धर्म , मूलभारतीय हिंदूधर्म और मूलभारतीय हिन्दूधर्म संस्कृति से अंजान है , हमारा शांति अहिंसा भाईचारा समता मानवता शील सदाचार का धर्म मानते नहीं !
दोनों विदेशी धर्म असभ्य और विकृति को अपनी शान मानते है दोनों धर्म के लोग गाय , घोड़े आदि जिंदा प्राणी को बांध कर , गिराकर एक होमहवन में विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के देवता ब्रह्मा, इंद्र सोम वरुण आदि को प्रसन्न कर ऊपर से अपने भले के लिये इच्छित वर मांगते है तो मुस्लिम लोग गाय , बकरी की बलि अल्लाह के नाम पर देते है और उसे कुर्बानी कहते है ! होम हवन में बलि और अल्लाह को कुर्बानी दोनों एक है ! जीव हत्या , पाप , नर्क का द्वार !
कबीर साहेब कहते है विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के पांडे पुजारी ब्राह्मण पूजा पाठ करते है , चन्दन तिलक लगाकर अपने को शुद्ध है , श्रेष्ठ है कहते है वैसे ही मुल्ले मौलवी अपने को कुरान के ज्ञानी , अल्लाह के बंदे बताते है पर सच तो ये है दोनों की सफेद दाढ़ी मूंछ बाल के बाद भी इन में जरा सी अक्ल नहीं आई है ! ये मूर्ख जो मांसाहार को ठीक मानते है , प्राणी हत्या को जायज मानते है और स्त्री पुरुष के रज और वीर्य को नापाक मानते है उसी नापाक रज वीर्य से जिंदा प्राणी का मांस मज्जा खून बना है और हर प्राणी में वो परमात्मा परमपिता चेतन तत्व राम बसता है !
ये अल्ला , ईश्वर राम भगवान को क्या जाने ! पूजा अर्चना प्रार्थना का ढोंग करते हैं , नमाज , रोजे, एकांत का ढोंग कर अल्लाह राम का खाली नाम लेने से ये नर्क से नहीं बच सकते !
ये तुर्की मुस्लिमधर्म और विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म हमारे धर्म नहीं , ना ये धर्म है ये तो विकृत ज्ञान है जिसको मान कर आपका नर्क में जाना निश्चित है !
कबीर साहेब कहते भाईयो इन दोनों विदेशी अधर्म को छोड़ो अपना शील सदाचार भाईचारा समता शांति अहिंसा का मूलभारतीय हिन्दूधर्म का पालन करो यही निर्वाण मोक्ष शांति सुख का मार्ग है !
#धर्मविक्रमादित्य_कबीरसत्व_परमहंस
#दौलतराम
#जगतगुरू_नरसिंह_मूलभारती
#मूलभारतीय_हिन्दधर्म_विश्वपीठ
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