#रमैनी : ८१
देव चरित्र सुनहु हो भाई * जो ब्रह्मा सो धियेउ नसाईं
दूजे कहों मंदोदरि तारा * जेहि घर जेठ सदा लगवारा
सुरपति जाय अहिल्या छरी * सुर गुरु घरणी चंद्रमें हरी
कहहिं कबीर हरि के गुण गाया * कुन्तीहि कर्ण कुंवारेहि जाया
#शब्द_अर्थ :
ब्रह्मा = विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म का संस्थापक ! चरित्र = आचरण ! धियेउ = पुत्री ! लगवारा = जार ! सुरपति = देवो का राजा इंद्र ! गुरु = वैदिक ब्राह्मण गुरु बृहस्पति ! घरणी = गृहस्थी , पत्नी ! हरि = वैदिक ब्राह्मणधर्म का एक देवता विष्णु या सूर्य !
#प्रज्ञा_बोध :
धर्मात्मा कबीर कहते हैं भाईयो सुनो उन विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के तथाकथित देव , ऋषि , गुरु और राजा के चरित्र , कारनामे जो कुख्यात है ! खुद ब्रह्मा जिसने विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म और वेद का निर्माता माना जाता है उसने खुद उसकी बेटी सरस्वती का बलात्कार किया बीवी बनाई ! उनसे नाजायज औलादे हुवि जिन्हे ब्राह्मण या बास्टर्ड भी कहा जाता है !
विदेशी वैदिक ब्राह्मणधर्म का एक राजा ब्राह्मण रावण जिसे ये लोग वैदिक धर्म का महापंडित कहते है अपने भाई विभीषण की पत्नी मंदोदरी का जार या अवैध पति बन उसका शोषण करता रहा !
वैदिक ब्राह्मणधर्म के ब्राह्मण राजा जिसे इंद्रदेव कहा जाता है उसने ब्राह्मण ऋषि अत्रि कि पत्नी अहिल्या को उसके पति का स्वांग रचकर धोखे से उसका पवित्र नष्ट किया उसे जीत जी शर्म से मार डाला ! विदेशी विष्णु ने मूलभारतीय राणी वृंदा का सतीत्व को तहस नहस कर दिया !
ब्राह्मणोंके एक और देव चंद्रमा ने अपने ही गुरु कि पत्नी का बलात्कार उसकी घर में घुस कर किया !
ये तो कुछ नमूने हुवे विदेशी वैदिक ब्राह्मणधर्म के ब्राह्मण देवो के यहां की विदेशी वैदिक ब्राह्मणधर्म के देव लोगों ने यानी ब्रह्मा , विष्णु यानी अग्नि और रुद्र इन तीन लोगों ने एकसाथ अनुसाया से बलात्कार कर दत्तात्रय नाम के ब्राह्मण देव को निर्माण किया जो शर्म के मारे पागलों की तरह भटकता रहा !
मूलभारतीय धर्म संस्कृति में मातृ शक्ति , मातृप्रधान व्यवस्था का बड़ा प्रभात रहा है जो आज भी दक्षिण भारत में पाया जाता है , महाभारत की शुरुवात भी मत्शगंधा यानी कोलिय वंश से होती है जो मुलता नागवंशी ही थे ! और मां के नाम से शान से लोग अपनी पहचान बताते थे जैसे पार्वतेय , कुंतेय , यशोदानंदन इत्यादि !
विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के देवो की इतनी चरित्र हीनता को छुपाने के लिए आगे उन्होंने महाभारत में झूठी कहानी घुसेड़ दी कुंती को कुंवारी रहते सूर्य के मंत्र से कर्ण नाम का पुत्र हुवा जब की मूलभारतीय स्त्री अपने पहले मूलभारतीय पति से विभक्त होकर दूसरे शादी की आम बात थी ! मूलभारतीय पांडु से हुवे पुत्रोंको विदेशी वैदिक ब्राह्मणधर्म के देवो के पुत्र बताकर इतिहास का चरित हरण किया !
कबीर साहेब विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के देव , ऋषि , गुरु , राजा सब को चरित्र हीन , गिरे हुवे लोग बताते है और उनके वैदिक ब्राह्मणधर्म को अधर्म और विकृति मानते है ! क्या कोई अधर्म विकृती का पालन कर कोई सुखी , दुख मुक्त हो सकता है ?
#धर्मविक्रमादित्य_कबीरसत्व_परमहंस
#दौलतराम
#जगतगुरु_नरसिंह_मूलभारती
#मूलभारतीय_हिन्दूधर्म_विश्वपीठ
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