#रमैनी : ८४
ये जियरा तैं अपने दुखहि सम्हार * जेहि दुख व्यापि रहा संसार
माया मोह बंधा सब लोई * अल्प लाभ मूल गौ खोई
मोर तोर में सबै बिगुर्चा * जननी गर्भ वोद्र मा सूता
बहुतक खेल खेलें बहु रूपा * जन भंवरा अस गये बहूता
उपजी बिनशि फिर जुइनी आवै * सुख को लेश सपनेहु नहिं पावै
दुख सन्ताप कष्ट बहु पावै * सो न मिला जो जरत बुझावै
मोर तोर में जरे जग सारा * धृग स्वारथ झूठा हंकारा
झूठी आस रही जग लागी * इन्हते भागि बहुरि पुनि आगी
जेहि हित के राखेउ सब लोई * सो सयान बाँचा नहिं कोई
#साखी :
आपु आपु चेते नहीं, कहोँ तो रुसवा होय /
कहहिं कबीर जो आपु न जागे, निरास्ति अस्ति न होय // ८४ //
#शब्द_अर्थ :
लोई = धर्मात्मा कबीर की पत्नी लोई ! मूल = स्वरूप, चेतन राम ! बिगुर्च = उलझन , कठिनाई ! रुसवा = क्रोधित , असहकारी ! घृग = व्यर्थ ! हंकारा = अहंकार , झूठी शान ! आगी = दुख की अग्नि , पछतावा ! लोई = लोग , धर्मात्मा कबीर की अर्द्धांगिनी !
#प्रज्ञा_बोध :
धर्मात्मा कबीर उनकी धर्मपत्नी लोई को लोगोंकी दुख भरी हालत बताते हुवे कहते है हे भाई तू अपना जीव दुखो से बचा ले , ये संसार दुख और दर्द से भरा पड़ा है ! इसका कारण भी जान ले , इस दुख दर्द का कारण तुम्हारे अज्ञान मोह माया अहंकार और अधर्म में ही है !
संसार में मेरा तेरा का राज चल रहा है , एक को सब कुछ चाहिए उसकी लालच की कोई सीमा नहीं दूसरा इसीमे शोषण का शिकार हो रहा है और वो भी सुख के लिए छटपटा रहा है जो उसे नही मिल रहा इस लिए दुखी है ! पूरा संसार दुख से भर गया है और जीव अपने मूल स्वरूप चेतन राम को भूलकर कभी न पूरी होने वाली तृष्णा के पीछे भाग कर बार बार जन्म मृत्यु के फेरे में फस गए है ! जन्म फिर पाप भरा वैदिक ब्राह्मणधर्म फिर मृत्यु फिर मृत्यु फिर जन्म ऐसा कुचक्र चल रहा है !
बहुतेक लोग इस संसार का मूलधर्म सत्य मूलभारतीय हिन्दूधर्म की शिक्षा भूल गए है जो बताती है की भाईयो ये संसार में चेतन राम निर्वाण अवस्था यानी निर्गुण निराकार अविनाशी अवस्था में विद्यमान है पर साथ साथ वो हम सब में स्वरूप मूलधर्म मूलभारतीय हिन्दूधर्म के सत्य स्वरूप में जग व्याप्त है जो उस चेतन राम के सत्य के मार्ग से चलेगा , मूलभारतीय हिन्दूधर्म के शील सदाचार भाईचारा समता शांति अहिंसा आदि मानवीय मूल्यों पर आधारित आदिधर्म सनातन पुरातन समतावादी मानवतावादी समाजवादी वैज्ञानिक दृष्टि का मूलभारतीय हिन्दूधर्म मार्ग पर चलेगा वो माया मोह तृष्णा अहंकार अज्ञान मुक्त होकर इन सब के कारण उत्पन्न हुवे जन्म मृत्यु के फेरे और पाप के कारण उत्पन्न दुख दर्द से बचेगा !
धर्म छोड़ कर अधर्म विदेशी वैदिक ब्राह्मणधर्म के पीछे भागने वाले और तुर्क से आया नए धर्म के पीछे भागने वाले सभी लोगोंको कबीर साहेब सावधान करते हुवे कहते है झूठी आशा ना करो , ब्रह्मिणोका स्वर्ग और तुर्क का जन्नत सब झूठा है सब बकवास है , सुख दुख यही है और जीव को है , आत्मा को नही ! इसी जीवन में जीव सत्यधर्म का पालन कर दुख मुक्त हो सकता है , बच सकता है , कम कर सकता है और वही मार्ग मैं लोगोंको बता रहा हूं !
कबीर साहेब कहते हैं भाई मैं आपको जगाने आया हूं , वैदिक अधर्म छोड़ दो तुर्की मार्ग भी ठीक नही ! अपना मार्ग स्वदेश का मूलभारतीय हिन्दूधर्म ही है वही सर्वश्रेष्ठ है , श्रेयस्कर और पालन योग्य है जो तुम्हे दुखो से मुक्ति देगा !
#धर्मविक्रमादित्य_कबीरसत्व_परमहंस
#दौलतराम
#जगतगुरु_नरसिंह_मूलभारती
#मूलभारतीय_हिन्दूधर्म_विश्वपीठ
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